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Teekamgarh MP: संस्कार के नाम पर अनूठी परंपरा, दूल्हे को बकरे पर बैठाकर बारात निकाली, दूल्हे की शादी भाभी से!

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Teekamgarh MP: संस्कार के नाम पर अनूठी परंपरा, दूल्हे को बकरे पर बैठाकर बारात निकाली, दूल्हे की शादी भाभी से!

टीकमगढ़: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ शहर में संस्कार के नाम पर एक ऐसी अनूठी परंपरा आज देखने को मिली जो वर्षों से चली आ रही है। शादी समारोह में दूल्हे की घोड़ी पर बारात निकलते तो सबने देखी होगी। टीकमगढ़ में शुक्रवार को एक ऐसी बारात निकली, जिसमें दूल्हे को घोड़ी की जगह बकरे पर बैठाकर बारात निकाली गई।

संस्कार के नाम पर टीकमगढ़ शहर वासियों को आज अनोखी बारात देखने को मिली जिसमें जमकर डांस हुआ। इसके बाद दूल्हे की उसकी भाभी से शादी कराई गई।

शहर के लोहिया समाज में यह अनोखी परंपरा कई सालों से चली आ रही है। परिवार के बड़े बेटे के कर्ण छेदन का संस्कार शादी समारोह की तरह बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। शहर के ताल दरवाजा निवासी प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि उनके बड़े पोते राघव अग्रवाल का कर्ण छेदन संस्कार गुरुवार को हुआ। आज समाज की परंपरा के अनुसार उसकी बकरे पर बारात निकाली गई। जिसमें परिवार के सभी सदस्य और रिश्तेदार शामिल हुए। गाजे बाजे के साथ निकाली गई बारात में खूब डांस हुआ। पटाखे फोड़कर जश्न मनाया गया। इसके बाद दूल्हे की रिश्ते में लगने वाली भाभी से शादी की रस्में निभाई गई।

प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से यह परंपरा चली जा रही है। कर्ण छेदन की सामाजिक परंपरा को शादी समारोह की तरह बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि बच्चों का कर्ण छेदन 18 साल से कम उम्र में करने की परंपरा है। यह हमारे समाज में 16 संस्कारों में से एक है।

उन्होंने बताया कि यह परंपरा उनके यहां पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। करीब 5 से 6 पीढ़ियों का उन्हें ध्यान है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा का निर्माण उनके परिवार को करना जरूरी होता है क्योंकि उनकी यह समाज की है वर्षों पुरानी परंपरा है जो धूमधाम से मनाई जाती है।