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सत्ता की चाह यहां भी और वहां भी…

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सत्ता की चाह यहां भी और वहां भी…

चाहे मध्यप्रदेश में 2023 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव की हो या फिर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की, सत्ता की चाहत में भाजपा और कांग्रेस दोनों दल लगातार कवायद में जुटे हैं। भाजपा जहां सत्ता में बने रहने के संघर्ष से जूझ रही है, तो कांग्रेस की चाहत सत्ता पाने की है। आखिर सत्ता वह फूल है जो आंगन में खिला रहे और सदा हरा भरा रहे, यही हर राजनैतिक दल की ख्वाहिश होती है‌।
रायपुर में जहां 2023 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस डेलिगेट्स के सम्मेलन की शुरुआत हुई है, जिसमें मंथन का मूल विषय यही है कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित पांच राज्यों के इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन सरकार बनाने वाला रहे और 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया पार हो सके। मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधानसभा चुनाव 2023 की तैयारियों का आगाज बुंदेलखंड के सागर से करने की तैयारी कर रही है। यह आयोजन रायपुर अधिवेशन के बाद मार्च में बीना तहसील में किया जाना प्रस्तावित है। इसके पीछे कांग्रेस की रणनीति यहां से लगी पचास विधानसभा सीटों पर फोकस करना है जो ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और भोपाल संभाग की हैं। कार्यक्रम में ढाई लाख लोगों को इकट्‌ठा किए जाने की रणनीति बनाई गई है, जो यहां से लगी विधानसभा सीटों से संबद्ध होंगे। तो कमलनाथ पत्र लिखकर कभी अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग करते हैं, तो कभी पेंशनर्स, कभी कोटवार की समस्याओं के समाधान की मांग मुख्यमंत्री से करते हैं।
वहीं जब केंद्रीय मंत्री अमित शाह सतना में कोल महाकुंभ में शिरकत कर रहे थे, तब क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल दमोह में कार्यकर्ताओं को जीत का मूलमंत्र बता रहे थे। निष्ठावान कार्यकर्ताओं के परिश्रम के बल पर आज भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनैतिक दल बनी है। देश भर में 18 करोड़ से अधिक पार्टी के सदस्य है। देश में सबसे ज्यादा सासंद, विधायक, जिला पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष जैसे जनप्रतिनिधि हमारे पार्टी के है। आमजन से सतत संपर्क ही पार्टी के जीत का मूल मंत्र है। आप सभी ने प्राथमिक इकाई में बूथ में जाकर के कार्य किया है जिसके कारण हम लगातार सत्ता में बने हुए है। जो भी कार्य बूथ, शक्ति केंद्र और मंडल के अधीन करणीय कार्य है उन्हें शीघ्रता से करते हुये निरंतर संगठन को सक्रिय बनाये रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उधर सतना के कोल जनजाति महाकुंभ में केंद्रीय गृहमंत्री ने फिर भाजपा सरकार बनाने का आह्वान किया है। शाह का मानना है कि हर गरीब का जीवन सुखी बनाने के लिए भाजपा संकल्पित है।
यानि कि मतलब साफ है सत्ता, सत्ता और सत्ता। भाजपा को भी सत्ता में बने रहने की चाहत है तो कांग्रेस को सत्ता में वापसी की चाहत। तो सत्ता की चाहत का यह सिलसिला जारी रहे… कांग्रेस और भाजपा अपने-अपने संगठन को चाक-चौबंद कर सत्ता की तरफ कदम बढ़ाते रहें।