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Third Term of Modi: धमाकेदार होगा अगला कार्यकाल

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Third Term of Modi: धमाकेदार होगा अगला कार्यकाल

इन दिनों जब देश में लोकसभा चुनाव की सरगर्मी है, तब प्रधानमंत्री का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें वे राजस्व अधिकारियों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि मेरी तीसरी शपथ ग्रहण के बाद आपका काम काफी बढने वाला है, तैयार रहिये। ये स्पष्ट तौर पर इस बात का संकेत है कि केंद्र में भाजपा सरकार के तीसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी मुहिम चलाई जा सकती है। ताज्जुब नहीं,इसकी चपेट में कुछ भाजपा समर्थित कारोबारी,कारखानेदार और नेता भी आ जायें। इतना तो तय जानिये कि मोदी जी अपने तीसरे कार्यकाल में देश में न्याय,समानता,ईमान,कर्मठता,देश प्रेम और तेज गति से जुड़े विकास के मामलों को न केवल विस्तार देंगे, बल्कि ऐसी व्यवस्था भी कर जायेंगे कि आने वाली अनेक सरकारें उन मानकों पर स्वेच्छा या मजबूरी से चलने को बाध्य होंगी।

 

इस वीडियो से दो बातें बेहद साफ हैं। पहली,मोदी सरकार फिर से अ रही है। दूसरी, मोदी जी इस बार वो कर जायेंगे, जिसकी कल्पना अभी तो शायद भाजपा वाले भी नहीं कर रहे। वैसे अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने काफी कुछ ऐसे संकेत तो दे ही दिये कि ठोस,अप्रिय लेकिन जनहितकारी फैसले लेने में उन्हें कोई संकोच नहीं होता। राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ उनका निरंतर चिंतन और क्रियान्वयन स्पष्ट हो चुका है। जहां 2019 के चुनाव में भाजपा ने करीब सवा सौ सासंदों के टिकट काटकर नये चेहरे उतारे थे, वहीं 2024 के चुनाव में 101 मौजूदा सांसदों की बिदाई कर नये कार्यकर्ताओं को मौका दिया है। यह बताता है कि अब भाजपा में चाहे जो 4-6 बार का विधायक या सासंद नहीं हो पायेगा। दल का आकार जिस तेजी से बढ़ रहा है और मूल भाजपा कार्यकर्ताओं के अलावा अन्य दलों से भी जिस प्रवाह से लोग आ रहे हैं, उन्हें समायोजित नहीं किया गया तो भाजपा की जड़ें भी हिल सकती हैं। इसलिये मानकर चलिये कि आने वाली भाजपा में पिता,पुत्र,पति-पत्नी,भाई,काका,मामा एकमुश्त संवैधानिक पदों पर नहीं रह पायेंगे। योग्य,समर्पित और निरंतर सक्रिय भाजपाई ही किसी पद के हकदार होंगे।

राजस्व अधिकारियों के बीच कही गई बात को चुनावी जुमला या लोकप्रियता की राजनीति का हिस्सा मानना भी बड़ी भूल होगी। आश्चर्य नहीं, यदि उनकी योजना पर काम भी प्रारंभ हो चुका हो। अभी सरकार पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह आयकर,ईडी,सीबीआई जैसे संस्थानों का उपयोग अपने हित के लिये,विरोधियों को परेशान करने के लिये कर रही है। इस तरह के आरोप हर सरकार पर लगते ही हैं और सच भी यही है कि कुछ मामलों में सराकरें ऐसा करती रही हैं, लेकिन ऐसे मसले न्यायालय की चौखट पर दम तोड़ देते हैं। इसलिये ये एजेंसियां अब जो भी कार्रवाई करेंगी,उसे न्यूनतम बिंदुओं का तो ध्यान रखना ही होगा, ताकि न्यायालय में उसकी और सरकार की किरकिरी न हो,विश्वसनीयता पर आंच न आये।

 

जिन अन्य बदलावों की चर्चा चलती है,उसमें समान नागरिक संहिता,एनसीआर(राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण),पाक अधिकृत कश्मीर को लेना या पाकिस्तान से पृथक करना,बलूचिस्तान को स्वतंत्रता दिलाना,एक देश-एक चुनाव व्यवस्था लागू करना जैसे मसले प्रमुख हो सकते हैं। मोदी सरकार कैसे इन पर चरणबद्ध काम करती है, देखना होगा। इसके अलावा देश को बड़ी आर्थिक ताकत बनाना भी मोदी जी की प्राथमिकताओं में है। वे स्वदेशी को बढ़ावा देकर मेक इन इंडिया के नारे को बुलंद कर इस दिशा में तेज कदम बढ़ायेंगे ही। देश में ऐसे अनेक विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाये जा सकते हैं, जहां करों में रियायत हो,जरूरी औपचारिकतायें एक छत के नीचे पूरी हों, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था हो। ऐसी ही एक परियोजना गुजराते के धोलेरा में आकार ले रही है, ,जहां दुनिया की आधुनिकतम सुविधायें जुटाकर औद्योगिक,कारोबारी,रहवासी प्रक्षेत्र विकसित किया जा रहा है,जिसका दुनिया में सानी नहीं होगा। संभव है,अगले कार्यकाल में मोदी जी अनेक प्रदेशों में ऐसा एक-एक क्षेत्र विकसित करने की पहल करें।

 

कांग्रेस मुक्त भारत कर देने के बाद उनका अगला कदम भ्रष्टाचार मुक्त भारत की दिशा में भी उठाया जा सकता है। बेशक ऐसा करना न तो आसान होगा, न पलक झपकते यह होगा। आखिरकार, इसके लिये जन भागीदारी ज्यादा जरूरी है। जब तक नागरिकों के मन में भी यह भाव नहीं आता कि वे बिना रिश्वत के काम करवायेंगे, तब तक व्यवस्था से जुड़े लोग भी आगे नहीं बढ़ पायेंगे। इसके लिये सरकार के स्तर पर कुछ कानून,कुछ प्रावधान और कुछ पहल जरूरी होगी।

 

संविधान को पूरी तरह बदल देने या ऐसे बड़े परिवर्तन की चर्चा जोर शोर से चल रही है। एक स्वतंत्र,सार्व भौम राष्ट्र के लिये यह आवश्यक भी है कि अंग्रेजोँ के कानून-नियम गहरे दफन कर दिये जायें। इसके लिये जरूरी नियम-प्रक्रिया भी अपनानी ही होगी,लेकिन यह तो होना ही चाहिये। आखिरकार हम कब तक अंग्रेजों की शिक्षा प्रणाली,अंग्रेजों के कानून-कायदे जारी रखेंगे? देश के तमाम राजनीतिक दलों को इस पर निजी स्वार्थ से परे होकर साथ देना चाहिये।

 

ये तो वे मुद्दे हैं, जिन पर कुछ समय से गाहे-बगाहे चर्चा होती रही है, लेकिन मोदी जी की चिंतन शैली,कार्य प्रणाली में चौंकाने वाले फैसले लेना प्रमुख है तो वैसे भी कुछ सकारात्मक बदलाव के लिये हमें प्रतीक्षा करना चाहिये, जो भारत राष्ट्र को अधिक समृद्धशाली,चैतन्य,सक्षम,विकसित,आत्म निर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो।