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कमलनाथ के छिंदवाड़ा में खूनी खेल की परम्परा

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श्रीप्रकाश दीक्षित की विशेष रिपोर्ट

छिंदवाड़ा: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा को कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री/केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ के कारण ज्यादा जाना जाता है क्योंकि यह पिछले चालीस बरस से भी ज्याद से उनका निर्वाचन क्षेत्र है.वैसे यह सत्तर के दशक में तब सुर्ख़ियों में आया जब 1977 में जनता पार्टी लहर में मध्यप्रदेश की 36 में से यह अकेली लोकसभा सीट थी जहाँ से कांग्रेस के गार्गी शंकर मिश्र जीते थे.तो 1980 की जनता पार्टी विरोधी लहर् में तो कांग्रेस को जीतना ही था.
आज कांग्रेस में जिस प्रकार राहुल बाबा का हल्ला है,तब संजय बाबा का होता था जिसके चलते यह पकी पकाई सीट उनके करीबी कमलनाथ की नजर कर दी गई. कमलनाथ तबसे यहाँ के बेताज बादशाह हैं.अभी वो विधायक तो उनके चश्मों चिराग नकुलनाथ सांसद हैं.वैसे वे एक बार स्वर्गीय पटवा से पराजित हो चुके हैं.दरअसल तब उन्होंने सांसद पत्नी अलकानाथ से इस्तीफ़ा दिलवा उपचुनाव लड़ा था.जनता ने जबरदस्ती के उपचुनाव को पसंद नहीं किया और उन्हें पराजित कर सबक सिखाया था.

छिंदवाडा और कमलनाथ से उसके रिश्ते के इतिहास में घुसने की गंभीर वजह है.बीते कल अख़बारों में पांढुर्णा के खूनी गोटमार मेले की खबर छपी है जो हर साल छपती है.वहशियाना कुप्रथा गोटमार मे हर साल हुकूमत की आँखों के आगे खून खराबा होता है. इस बार हिंसक पत्थरबाजी में करीब 300 घायल हुए जिनमे 16 की हालत गंभीर है जिनमे कुछ को नागपुर रिफर किया है। बीते सालों यहाँ तेरह जाने जा चुकी हैं.सवाल है की कमलनाथ जैसे धीर-गंभीर,प्रगतिशील और असरदार जनप्रतिनिधि के बावजूद यह खूनी परम्परा क्यों जारी है…? क्या वे इसके समर्थक हैं…? यदि नहीं तो इसे बंद कराने के लिए उन्होने अब तक कुछ क्यों नहीं किया.? इसका उन्हे जवाब देना चाहिए.उनका दायित्व था की जनता को जागरूक कर खूनी पत्थरबाजी को खत्म करवाते.? इसे पुष्प वर्षा में बदला जा सकता है.पिछले साल इसी जिले में एक महिला की अग्नि परीक्षा की शर्मसार करने वाली घटना हो चुकी है.क्या उस परिवार से भेंट कर जागरूक करने की पहल की थी..?