WhatsApp Image 2025 08 07 At 9.31.47 PM
Home कॉलम

आखिर नहीं बन सकी ‘दीदी मां’ उमा भारती

1257

आखिर नहीं बन सकी ‘दीदी मां’ उमा भारती

पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती आखिर झूठी साबित हो गई।वे 17 नबंवर से उमा दीदी की जगह उमा दीदी मां बनकर राजनीति और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान कर चुकी थीं, लेकिन उनसे ये नहीं हो सका। वे दो दिन भी अपनी घोषणा पर कायम नहीं रह सकीं। शनिवार को छत्तीसगढ़ के गौरेला पहुंच कर उमा भारती ने अपना राजनीतिक रंग दिखाने में कोई शर्म महसूस नहीं की।

उमा भारती ने इसी महीने के पहले सप्ताह में कहा था कि वे जैन मुनि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के निर्देश पर उन्होंने दोबारा संन्यास लेने का ऐलान किया था। अटकलें लगाई जा रहीं थी कि उमा भारती जैन धर्म स्वीकार करने जा रहीं हैं। लेकिन उमा भारती , अपने आपको दीदी मां नहीं बना सकीं। उन्होंने जैसे अपनी पहली गुरु आनंदमयी मां को धोखा दिया वैसा ही जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज के साथ भी किया।

Uma Bharti Pachmarhi MP crop

30 साल पहले सन्यास लेने वाली उमाश्री भारती ने फिर दोहराया कि मैं आखिरी समय तक राजनीति से प्यार करते रहूंगी। और राजनीति को मैं सेवा मानती हूं। सत्ता की राजनीति भी अच्छी होती है।

कांग्रेस के पुराने नेता और भाजपा के उभरते आशाकेंद्र ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर उमा भारती का वात्सल्य उमड़ा पड़ रहा है।वे कहती हैं कि कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूप में हीरा खो दिया।

उमा भारती उस कहावत को चरितार्थ कर रहीं हैं कि -‘चोर चोरी करना भले ही छोड़ दे लेकिन हेराफेरी नहीं छोड़ सकता।उमाश्री ने दोहराया कि, मध्यप्रदेश में हम विधानसभा चुनाव 2018 में हारे थे तो ज्योतिरादित्य सिंधिया के कारण ही हारे थे, और बाद में हमारी सरकार भी उन्हीं के कारण बनी है। इसलिए मैं सिंधिया को हीरा बोल रही हूं। शिवराज सिंह चौहान अपनी जगह हैं।

भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति से बेदखल की जा चुकी उमा भारती को मप्र में भी कोई पूछ नहीं रहा किंतु वे मप्र की राजनीति में दखल दिए मानती नहीं है। उन्होंने कहा कि, अब मुझे नहीं लगता कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस 15 से 20 सीट से ज्यादा जीत पाएगी। लेकिन मैं कांग्रेस को नीची नजर से देखकर उनका उपहास नहीं करना चाहती ।

IMG 20221121 WA0008

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर तंज कसते हुए उमा ने कहा कि, मैं राहुल गांधी की हंसी नहीं उड़ा सकती, लोकतंत्र में सभी को अपने कार्यक्रम का अधिकार है। मैं उनकी निंदा नहीं कर सकती।

उमा भारती का भ्रम देखिए कि वे खुद को ने कहा कि, मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीति में प्रासंगिक पाती हैं। वे दंभ से कहती हैं कि ‘ मैं एकमात्र नेता हूं जो दो राज्यों से विधानसभा चुनाव लड़ी और दोनों राज्यों से सीएम की दावेदार रहीं।’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जीवंत शक्ति बतलाते हुए कहा कि, ऐसा दुर्लभ व्यक्ति मैंने जीवन में नहीं देखा, जिनको सामर्थ्य और बुद्धि परमात्मा ने दी है। और मैं मोदी की बड़ी प्रशंसक हूं।

उमा भारती के भटकाव का अंत अब कब होगा ये खुद उमा भारती भी नहीं जानतीं, लेकिन एक संन्यासी के रूप में उनकी मान्यता और विश्वसनीयता दोनों पर प्रश्नचिन्ह लग चुका है।अब उमा भारती ने पार्टी में भरोसे की रहीं हैं न समर्थकों के बीच।साधू -संतों के बीच तो वे पहले से ही कुख्यात हैं।

उमा भारती के बारे में मैंने 6 नबंवर को ही विस्तार से लिखा था। अब उनके बारे में लिखने को कुछ बचा भी नहीं है। उमा भारती अब राजनीति का विस्मृत अध्याय बन चुकी हैं। उनके लिए न दिल्ली में ठौर है और न भोपाल तथा लखनऊ में कोई जगह नहीं है। संन्यास उन्हें बांध नहीं पा रहा और राजनीति उन्हें तिरस्कृत कर रही है।

राजनीति को जानने, समझने वाले जानते हैं कि अगले साल होने वाले मप्र विधानसभा चुनाव में भी उमा भारती की कोई भूमिका नहीं रहने वाली।वे अपने भतीजे का टिकट ही हासिल कर लें यही बहुत है