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‘चालाक शिकारी’ पर ग्रामीणों का प्रहार: तेंदुए को लाठी-डंडों से मार गिराया

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‘चालाक शिकारी’ पर ग्रामीणों का प्रहार: तेंदुए को लाठी-डंडों से मार गिराया

– राजेश जयंत

मध्यप्रदेश के पश्चिम सीमांत जनजातीय बहुल अलीराजपुर जिले के सोंडवा क्षेत्र स्थित ग्राम बेसवानी में बुधवार दोपहर एक सनसनीखेज घटना में ग्रामीणों ने एक आक्रामक तेंदुए को घेरकर लाठियों और पत्थरों से पीटकर मौत के घाट उतार दिया। यह घटना तब हुई जब तेंदुआ लगातार दूसरी बार गांव में पशु पर हमला कर चुका था और बुधवार दोपहर एक ग्रामीण को उसने अपना निशाना बनाया।

कैसे हुआ तेंदुए पर हमला..?
बुधवार दोपहर मे दो पहाड़ियों के बीच एक गड्ढे से तेंदुआ अचानक गांव की ओर निकला और एक ग्रामीण पर झपट पड़ा। इससे पहले मंगलवार रात और सुबह उसी तेंदुए ने गांव की बकरियों पर हमला किया था, जिससे लोग पहले से डरे हुए थे। जैसे ही ग्रामीण पर हमला हुआ, गांव के अन्य लोग लाठी-डंडे और पत्थर लेकर इकट्ठा हुए और घेराबंदी कर तेंदुए पर हमला बोल दिया। समवेत प्रयास से तेंदुआ मारा गया।

वन विभाग ने की पुष्टि, जांच जारी
वन विभाग के एसडीओ अंतरसिंह ओहरिया ने तेंदुए की मौत की पुष्टि की है। विभाग की टीम बेसवानी पहुंचकर मृत तेंदुए का पोस्टमॉर्टम कर रही है और घटना की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत संरक्षित वन्य जीवों की हत्या गंभीर अपराध है, लेकिन अगर यह आत्मरक्षा का मामला साबित होता है, तो कानूनी समाधान संभव है।

कुछ दिन पहले भी हुआ था हमला
कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में बकरी के शिकार की सूचना पर तेंदुए की तलाश में गए वन अधिकारियों पर भी हमला हुआ था। इस हमले में वन रक्षक *
जीवन मंडलोई और बीट गार्ड विपुल चौहान घायल हुए थे, जबकि वनकर्मी लोकेंद्र कुशवाहा को मानसिक तनाव के चलते अस्पताल में भर्ती किया था। उसे वक्त भी ग्रामीण
कविंद्र ने पत्थर फेंककर अफसरों की जान बचाई थी।

ग्रामीण इलाकों में संकट बढ़ता जा रहा
अब यह स्पष्ट है कि अलीराजपुर के सोंडवा अंचल की पहाड़ियों में मानव-वन्य संघर्ष एक गंभीर मोड़ ले चुका है। जहां एक ओर वन्य जीवों के लिए रहने की जगह और भोजन कम हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आबादी जंगलों के आसपास फैलती जा रही है। वन्य भूमि में लगातार बढ़ती इंसानी दखलअंदाजी से इंसान और जानवरों में टकराव बढ़ रहा है।
जंगल, जो कभी जानवरों का सुरक्षित घर हुआ करता था, अब मनुष्यों द्वारा कब्जा और पट्टा पाने की होड़ में सिकुड़ता जा रहा है। खेत बनाने की चाह, आवासीय विस्तार और सुविधाओं की खोज ने जानवरों के प्राकृतिक क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया है। नतीजा यह कि अब तेंदुए जैसे जानवर भोजन और आश्रय की तलाश में इंसानी बस्तियों तक आने को मजबूर हैं।
ऐसे में ‘शिकार और शिकारी’ की सीमाएं ध्वस्त होती जा रही हैं।

समाधान क्या है..?
यह केवल एक तेंदुए की मौत की खबर नहीं है- यह इशारा है जंगल और इंसान के रिश्ते में आई उस दरार का, जो हर बार किसी न किसी की जान लेती है। ज़रूरत है कि सरकार तत्काल प्रभाव से ऐसे क्षेत्रों को मानव-वन्य संघर्ष क्षेत्र घोषित करे, मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए, वन्य जीवों के ठिकानों को सुरक्षित किया जाए और अवैध अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई हो। तभी इंसान और जानवर दोनों साथ रह पाएंगे, अन्यथा यह संघर्ष आने वाले समय में और भी विस्फोटक होगा।