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Who Will be Next Sebi Chief: 3 टॉप ब्यूरोक्रेट्स के नामों की अटकलें, माधवी पुरी बुच का कार्यकाल 28 फरवरी को हो रहा समाप्त!

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Who Will be Next Sebi Chief: 3 टॉप ब्यूरोक्रेट्स के नामों की अटकलें, माधवी पुरी बुच का कार्यकाल 28 फरवरी को हो रहा समाप्त!

 

नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष के रूप में माधवी पुरी बुच का कार्यकाल 28 फरवरी को समाप्त होने वाला है, और इस बात को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है कि देश के बाजार नियामक का कार्यभार कौन संभालेगा।

 

सत्ता के गलियारों में अटकलें जोरों पर हैं, लेकिन कोई भी ठोस भविष्यवाणी करने को तैयार नहीं है, क्योंकि सरकार का अप्रत्याशित निर्णय लेने का इतिहास रहा है, जो अक्सर सट्टेबाजों को गलत साबित करता है – पिछली प्रमुख नियुक्तियाँ भी इसी प्रवृत्ति का संकेत देती हैं।

 

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली वित्तीय क्षेत्र विनियामक नियुक्ति खोज समिति (FSRASC) अगले सेबी चेयरमैन के लिए अपनी सिफारिश को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार को बैठक करेगी। इसके बाद चयनित नाम को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के पास भेजा जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक माधबी पुरी बुच के तीन साल के कार्यकाल के आखिरी दिन से मेल खाती है।

 

हमारे सूत्रों से पता चलता है कि किसी अनुभवी नौकरशाह को सेबी का अगला अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है।

 

फिलहाल विचाराधीन नामों में सबसे ऊपर जिनका नाम चर्चा में है वह है भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1987 बैच के अधिकारी तुहिन कांता पांडे। वे वर्तमान में वित्त सचिव और राजस्व सचिव है।

1987 बैच के ही अजय सेठ सचिव, आर्थिक मामले विभाग भी इस दौड़ में शामिल हैं।

1987 बैच के ही एक और अधिकारी पंकज जैन सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का नाम भी इस महत्वपूर्ण पद के लिए चर्चा में है।

इसके अलावा अश्विनी भाटिया पूर्णकालिक सदस्य, सेबी और

आनंद मोहन बजाज (IA&AS:1990) उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (पूर्व सेबी सदस्य) का नाम भी चल रहा है।

इनमें पहले तीन नाम- तुहिन कांत पांडे, अजय सेठ और पंकज जैन- शीर्ष दावेदार के रूप में देखे जा रहे हैं।

केंद्र सरकार ने 27 जनवरी, 2025 को सेबी चेयरमैन पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। नियुक्ति FSRASC की सिफारिश के आधार पर की जाएगी, जिसके पास ऐसे उम्मीदवार को सुझाव देने का विवेकाधिकार भी है, जिन्होंने औपचारिक रूप से आवेदन नहीं किया है, बशर्ते वे पात्रता और योग्यता मानदंडों को पूरा करते हों।