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स्कूल खुलने में सिर्फ एक सप्ताह बाकी, जर्जर स्कूलों की मरम्मत अब भी अधर में

मरम्मत कार्य के लिए अब तक प्रस्ताव नहीं हुआ तैयार, छात्रों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल

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स्कूल खुलने में सिर्फ एक सप्ताह बाकी, जर्जर स्कूलों की मरम्मत अब भी अधर में

भोपाल। राजधानी में मानसून ने दस्तक दे दी है। लगातार बारिश, तेज हवाओं और आंधी-तूफान का दौर जारी है। ऐसे में भोपाल के सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें एक बार फिर चिंता का विषय बन गई हैं। बारिश के दौरान स्कूलों में जलभराव, छतों से पानी टपकने और भवनों की कमजोर स्थिति जैसी समस्याएं सामने आती हैं, जो सीधे तौर पर विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ी हैं। हैरानी की बात यह है कि स्कूल खुलने में अब केवल एक सप्ताह शेष है, लेकिन स्कूलों की मरम्मत के लिए अब तक कोई प्रस्ताव तक तैयार नहीं हो पाया है।

मानसून के मौसम में सरकारी स्कूलों को सबसे अधिक मरम्मत और रखरखाव की जरूरत होती है। हर साल बारिश के दौरान कई स्कूलों में भवन संबंधी समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन इस बार भी विभागीय स्तर पर तैयारी न के बराबर दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार, मरम्मत कार्य के लिए अभी तक बजट तय नहीं हुआ है, जिसके कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छात्रों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन की यही संवेदनशीलता है?

पिछले वर्ष भी स्कूल मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत होने में काफी देरी हुई थी। अगस्त तक भी कई स्कूलों को आवश्यक राशि नहीं मिल पाई थी। उस समय भोपाल जिले में करीब 375 स्कूल जर्जर स्थिति में चिन्हित किए गए थे, जिनमें लगभग 100 स्कूलों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता थी। इस वर्ष भी स्थिति बहुत अलग नहीं है।

वर्तमान में कस्तूरबा कन्या विद्यालय, नूतन सुभाष स्कूल, सुल्तानिया स्कूल और जहांगीरिया स्कूल सहित कई सरकारी विद्यालय ऐसे हैं, जहां मरम्मत की सख्त जरूरत बताई जा रही है। कुछ स्कूल टीनशेड में संचालित हो रहे हैं, जबकि कई भवनों की छतें बारिश में टपक रही हैं।

डीईओ ने कहा

‘स्कूल प्राचार्यों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं, लेकिन अभी तक कई स्कूलों की ओर से मरम्मत संबंधी प्रस्ताव और बजट की जानकारी नहीं भेजी गई है। इसी वजह से प्रक्रिया में देरी हो रही है। बजट पिछले साल के आसपास ही रहने की संभावना है, लेकिन अभी कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता। पिछले वर्ष कई स्कूलों की मरम्मत हो चुकी है, इसलिए इस बार जर्जर स्कूलों की संख्या कुछ कम हो सकती है।’

क्या एक सप्ताह में पूरी हो पाएगी तैयारी?

स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने में अब केवल एक सप्ताह का समय बचा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इतने कम समय में मरम्मत कार्य शुरू होकर पूरा भी हो पाएगा, या फिर हर साल की तरह इस बार भी बारिश बीतने के बाद काम शुरू होगा? जबकि सबसे ज्यादा जरूरत तो मरम्मत की बारिश के मौसम में ही होती है।