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Fake SDM Arrested : फर्जी एसडीएम ने युवक से नौकरी लगाने के नाम पर 1 लाख ठगे! 

एसडीएम लिखी कार उज्जैन से लेकर आता, पुलिस उस ड्राइवर से भी पूछताछ करेगी!

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Fake SDM Arrested : फर्जी एसडीएम ने युवक से नौकरी लगाने के नाम पर 1 लाख ठगे! 

Indore : पुलिस ने यहां एक फर्जी एसडीएम को गिरफ्तार किया है। इस ठग ने एक युवक ने स्टेनो के पद पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक लाख रुपए ठग लिए थे। युवक कार में लाल बत्ती और नीली बत्ती लगाकर घूमता था और लोगों पर रौब झाड़ता था। युवक के घर के बाहर एसडीएम लिखी नेम प्लेट भी पुलिस को मिली। मामला दो दिन पहले सामने आया। सोमवार को पुलिस ने आरोपी को पकड़कर पूछताछ की। टीआई सीबी सिंह ने बताया कि सारांश मिश्रा की शिकायत पर संकेत चव्हाण निवासी स्मार्ट लिंविग पुष्प विहार कॉलोनी खजराना के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।

यह फर्जी एसडीएम खुद को भोपाल में राजस्व विभाग में डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्त बताता था। बीबीए के छात्र सारांश मिश्रा से आरोपी संकेत चव्हाण की मुलाकात महालक्ष्मी नगर मंदिर में हुई थी। ठग युवक मूल रूप से महाराष्ट्र का रहने वाला है। उसने फर्जी अधिकारी बनकर ठगी की कई वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल फर्जी एसडीएम को एमआईजी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ चल रही है।

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पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे सर्जरी के लिए पैसों की जरूरत थी, इसलिए उसने ऐसा किया। जानकारी के मुताबिक इंदौर के एक बीबीए छात्र सारांश मिश्रा के साथ यह ठगी तब हुई, जब आरोपी संकेत चव्हाण ने खुद को भोपाल में राजस्व विभाग का अपर कलेक्टर बताया। उसने बहुत ही चालाकी से छात्र को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया और इस बहाने उससे एक रुपये ऐंठ लिए।

इस ठगी का खुलासा तब हुआ, जब छात्र सारांश मिश्रा को संदेह हुआ और उसने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को ट्रेस किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि संकेत चव्हाण पहले भी इसी तरह की ठगी की घटनाओं को अंजाम दे चुका है। आरोपी ने ऐसे कागजात भी तैयार कर लिए थे, जिन्हें देखकर लगे की शासकीय कागजात हैं, उन सबका परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस को जानकारी मिली है कि संकेत एसडीएम लिखी कार उज्जैन से लेकर आता है। वहां वह किसी अफसर के ड्राइवर के संपर्क में था। पुलिस अब इस मामले में उज्जैन के ड्राइवर से भी पूछताछ करेगी।

 

इसलिए शक हुआ तो शिकायत की 

शिकायतकर्ता सारांश ने बताया कि वह अपने पिता को लेकर संकेत चव्हाण के बताए पते पर रुपए लेकर पहुंचा। घर के बाहर दरवाजे पर डिप्टी कलेक्टर की नेम प्लेट लगी थी। संकेत ने करीब 1 लाख 10 हजार रुपए 3-4 किस्तों में लिए। बाद में संकेत 3 लाख रुपए मांगने लगा। कुछ डॉक्यूमेंट बनवाए, लेकिन जब उसके डिपार्टमेंट में जांच कराई तो वह फर्जी निकले। शंका होने पर उसके घर पहुंचे तो वहां से नेम प्लेट नहीं थी। जब पता किया तो जानकारी मिली कि संकेत नासिक (महाराष्ट्र) का रहने वाला है। वहां भी इसी तरह की ठगी करके फरार हुआ। उसके खिलाफ पुलिस में जाने की बात कही तो उसने करीब 40 हजार रुपए दो किस्तों में वापस कर दिए।