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SIR Pressure-BLO Suicide: जीना तो चाहता हूं पर क्या करूं….4 बेटियों की चिंता में टूट गया BLO: SIR के दबाव ने ली जान!

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SIR Pressure-BLO Suicide

SIR Pressure-BLO Suicide:जीना तो चाहता हूं पर क्या करूं….4 बेटियों की चिंता में टूट गया BLO: SIR के दबाव ने ली जान!

मुरादाबाद में बीएलओ सर्वेश सिंह ने सुसाइड नोट में अपने स्कूल के बच्चों के प्रति प्यार और दिल की कशमकश को दर्शाया है। उन्होंने लिखा मुझे माफ करना मेरे विद्यालय के प्यारे बच्चों। बहुत बहुत प्यार। मन लगाकर पढ़ाई करना मेरे बच्चों, दिल बहुत दुख रहा है। लिखते हुए मन नहीं मान रहा है। कुछ समय से आपको (बच्चों को) शिक्षण कार्य नहीं करा पाया। 

मुरादाबाद: जिले के भोजपुर क्षेत्र के बहेड़ी गांव से रविवार सुबह एक ऐसा दर्दनाक मामला सामने आया जिसने पूरे शिक्षकीय समाज को हिला दिया। सहायक अध्यापक और BLO सर्वेश सिंह ने अपने कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी। वे पिछले कुछ सप्ताह से SIR के लगातार बढ़ते दबाव से टूट चुके थे। सुबह उनका शव कमरे में लटका मिला तो पूरा परिवार विलाप कर उठा।
▫️इसी बीच संभल से भी एक और दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां नखासा थाना क्षेत्र के गांव चौकुनी निवासी और अमरोहा जिले के हसनपुर ब्लॉक के फैयाजनगर प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के रूप में तैनात शिक्षक अरविंद कुमार (38) की सोमवार सुबह करीब चार बजे हार्ट अटैक से मौत हो गई। वे SIR कार्य में सहायक के रूप में नियुक्त थे। परिजन का आरोप है कि उन पर 1196 फॉर्म पूरे करने का भारी दबाव था। उनके साथ कार्य कर रहे शिक्षामित्र लाल सिंह ने बताया कि दोनों को मिले कुल 1196 फॉर्म में से 970 ऑनलाइन कर दिए गए थे, लेकिन अधिकारियों की ओर से लगातार लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा था।
▫️उधर, अरविंद की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है। पत्नी प्रतिभा देवी, बेटी गरिमा, बेटा लविश और परिजन लगातार रो रहे हैं। गांव का माहौल गमगीन है और लोग इसे प्रशासनिक दबाव का परिणाम मान रहे हैं।

▪️ तीन पेज का सुसाइड नोट
▫️ सर्वेश सिंह ने आत्महत्या से पहले बेसिक शिक्षा अधिकारी को तीन पेज का सुसाइड नोट लिखा। उसमें उन्होंने साफ लिखा कि SIR के काम का इतना दबाव था कि वे मानसिक रूप से बिखरते चले गए। लगातार रात-दिन काम, नींद की कमी, डर, बेचैनी और चिंता ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया। उन्होंने लिखा कि कई बार कोशिश करने पर भी उनका टारगेट पूरा नहीं हो पा रहा था और वे खुद को सक्षम साबित नहीं कर पा रहे थे। यही असफलता उनके मन पर भारी होती चली गई।

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▪️ चार बेटियों की चिंता ने भीतर से खोखला कर दिया
▫️ सर्वेश ने नोट में अपनी चारों बेटियों का विशेष उल्लेख किया। दो बेटियां कई दिनों से बीमार थीं और यह चिंता उन्हें और बेचैन कर रही थी। सुसाइड नोट की एक लाइन मन झकझोर देती है— “मैं जीना तो चाहता हूं पर क्या करूं। मुझे बहुत घुटन हो रही है। डर लगा रहता है।”
पत्र में यह दुख बार-बार दिखता है कि परिवार की जिम्मेदारियां निभाने की उनकी इच्छा थी लेकिन मानसिक दबाव ने रास्ता बंद कर दिया।

▪️ आत्महत्या से एक दिन पहले का वीडियो सामने आया
▫️ घटना को और गंभीर बनाता है वह वीडियो जिसमें सर्वेश फूट फूटकर रो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे बीस दिन से ठीक से सोए ही नहीं हैं। अपनी मौत की जिम्मेदारी भी उन्होंने खुद पर ही डाली।
वीडियो में उनकी थकी हुई आवाज में एक ही बात बार-बार आती है —
“मैं SIR के काम में निपुण नहीं हूं।”
उनकी हालत देखकर साफ लगता है कि वे लंबे समय से मानसिक तनाव में थे।
▪️ BLO बनने के बाद पहली ही बार में दबाव का ऐसा पहाड़
▫️ सर्वेश सिंह को सात अक्टूबर को ही पहली बार BLO नियुक्त किया गया था। उन्हें यह जिम्मेदारी बिल्कुल नई मिली थी और अनुभव की कमी के कारण वे सिस्टम की मांग के अनुसार तेजी से काम नहीं कर पा रहे थे।
सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि समय बहुत कम है और अनुभव न होने से टारगेट पूरा करना लगभग असंभव हो रहा था। उनकी यह बेबसी लगातार बढ़ती गई।
▪️ उत्तर प्रदेश में SIR शुरू होने के बाद अब आठ BLO की मौत
▫️ UP में BLO की मौतों का आंकड़ा अब और ज्यादा चिंता बढ़ा रहा है। SIR शुरू होने के बाद अब आठ BLO की जान जा चुकी है। इनमें से तीन ने तनाव के चलते आत्महत्या की है। चार की मौत हार्ट अटैक से हुई और एक की ब्रेन हेमरेज से।
यह आंकड़ा बताता है कि शिक्षकों और BLO पर काम के अत्यधिक दबाव का असर किस हद तक गंभीर हो चुका है।

BLO की लगातार हो रही की मौत केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि पूरे शिक्षकीय तंत्र पर उठता बड़ा सवाल है।
जो व्यवस्था शिक्षकों से रात-दिन काम करवाने पर आमादा है वह उनके मानसिक स्वास्थ्य को किस कीमत पर कुचल रही है। SIR के बढ़ते बोझ, लक्ष्य की अव्यावहारिक मांग और लगातार निगरानी ने एक और परिवार को उजाड़ दिया। चार बेटियों का पिता हार गया लेकिन उसकी बेबसी यह बता गई कि सिस्टम का दबाव अब सीधे जान ले रहा है।

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