WhatsApp Image 2025 08 07 At 9.31.47 PM
Home न्यूज़ प्रादेशिक

प्रसंगवश विशेष महाशिवरात्रि :- चार प्रहर की पूजा से — धर्म–अर्थ–काम–मोक्ष की सिद्धि

322
WhatsApp Image 2026 02 13 At 18.12.21

प्रसंगवश विशेष महाशिवरात्रि :- चार प्रहर की पूजा से — धर्म–अर्थ–काम–मोक्ष की सिद्धि

महाशिवरात्रि महापर्व विशेष 2026 पर ज्योतिर्विद राघवेंद्र रविशराय गौड़
ने बताया कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी : 15 फरवरी 2026, रविवार
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ: 14 फरवरी रात 10:15 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 15 फरवरी संध्या 06:42 बजे तक

WhatsApp Image 2026 02 13 at 18.17.51

ज्योर्तिविद श्री राघवेन्द्र रवीशराय गौड़ के अनुसार महाशिवरात्रि महापर्व केवल उत्सव नहीं, शिवतत्त्व से मिलने का दिव्य अवसर है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की यह पावन रात्रि चार प्रहर की विशेष पूजा, व्रत, जप और ध्यान के माध्यम से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – चारों पुरुषार्थ प्रदान करने वाली मानी गई है।

 

महाशिवरात्रि 2026 : चारों प्रहर की पूजा समय और विधि का उल्लेख करते हुए बताया कि
प्रथम प्रहर की पूजा

समय: संध्या 6:०० बजे से रात 9:०० बजे तक ( 15फरवरी)
विशेष अर्पण: दूध से अभिषेक
पाठ: रुद्राष्टाध्यायी
फल: मन की शुद्धि, सद्बुद्धि, पारिवारिक सुख
द्वितीय प्रहर की पूजा

समय: रात 9:०० बजे से मध्यरात्रि 12:०० बजे तक
विशेष अर्पण: गन्ने का रस (इखुरस) से अभिषेक
पाठ: रुद्राष्टाध्यायी
फल: धन-धान्य, आर्थिक स्थिरता, गृहस्थ सुख
तृतीय प्रहर की पूजा

समय: मध्यरात्रि 12:०० बजे से प्रातः 3:०० बजे तक
विशेष अर्पण: भांग मिश्रित जल से अभिषेक
पाठ: रुद्राष्टाध्यायी + शिव स्तुति
फल: काम-विकारों से मुक्ति, आत्मा-परमात्मा मिलन
चतुर्थ प्रहर की पूजा

WhatsApp Image 2026 02 13 at 18.16.56

समय: ब्रह्ममुहूर्त प्रातः 3:०० बजे से 6:०० बजे तक (16 फरवरी)
विशेष अर्पण: गुलाब जल से अभिषेक
पाठ: रुद्राष्टाध्यायी
फल: उज्ज्वल भविष्य, भवसागर से मुक्ति, मोक्ष प्राप्ति

पंच पल्लव –
शिव को प्रिय पाँच पत्ते
1. बिल्वपत्र – तीनों लोक के तीर्थ निवास करते हैं
2. भांग पत्ते – समुद्र मंथन के विषपान उपचार
3. आक पत्ते – अकाल मृत्यु से रक्षा
4. धतूरा – धन-धान्य की समृद्धि
5. दूर्वा – अमृत का वास, संपूर्ण रक्षा

पंडित राघवेंद्र रविश राय गौड़ ने बताया कि ज्योतिषीय रूप से चतुर्दशी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान शिव हैं। इस दिन चंद्रमा क्षीण रहते हैं और शिव मस्तक पर स्थित चंद्र को प्रसन्न करने से मन, स्मरणशक्ति, इच्छा-शक्ति और साहस प्रबल होते हैं।

पौराणिक कथाओं में यह तिथि शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और निषादराज की अनजाने में किए गए पूजन से मोक्ष प्राप्ति की कथा से जुड़ी है। इससे स्पष्ट है कि भोलेनाथ भक्त की भावना देखते हैं, न कि केवल बाह्य आडंबर।
बेलपत्र, भांग, आक, धतूरा और दूर्वा – ये पंच पल्लव भगवान शिव को अतिप्रिय हैं। भक्ति-भाव से इन्हें अर्पित करने से अकाल मृत्यु, विष, रोग और विघ्नों से रक्षा होती है तथा घर-परिवार पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है।

महाशिवरात्रि पर अपनी-अपनी राशि के अनुसार विशेष अभिषेक, मंत्र-जप और स्तोत्र-पाठ करने से आयु, आरोग्य, यश, धन, बल और संतति-सुख की प्राप्ति होती है।
प्रार्थना: ईश्वर करें हम सभी के जीवन में शिवतत्त्व का उदय हो। हमारा जीवन सदैव पार्वतीवल्लभ भगवान महादेव के श्रीचरणों में लीन रहे।
आप सभी को 15 फरवरी 2026 को गोरी-शंकर विवाह महोत्सव एवं महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई।

ॐ कस्तूरिकाकुंकुमचर्चितायै
चितारजः पुंजविचर्चिताय ।
कृतस्मरायै विकृतस्मराय
नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

हर हर महादेव 🎇
~~~~~~~
प्रस्तुति डॉ घनश्याम बटवाल मंदसौर