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इंदौर में जलसंकट पर फूटा जनाक्रोश, मेयर के सामने भड़के विधायक महेंद्र हार्डिया

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इंदौर में जलसंकट पर फूटा जनाक्रोश, मेयर के सामने भड़के विधायक महेंद्र हार्डिया

वरिष्ठ पत्रकार के के झा की विशेष रिपोर्ट

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाला इंदौर आज बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। शहर के कई इलाकों में जलसंकट अब विकराल रूप ले चुका है। नलों में पानी नहीं, टंकियां आधी खाली, टैंकर गायब और जो मिल रहे हैं वे खुलेआम लोगों की मजबूरी का सौदा कर रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि जनता सड़कों पर उतर आई है, कांग्रेस निगम प्रशासन के खिलाफ आक्रामक आंदोलन कर रही है और अब सत्ताधारी भाजपा के विधायक भी अपनी ही सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी जताने लगे हैं।

पांच नंबर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड-41 में जलसंकट की स्थिति देखने पहुंचे विधायक महेंद्र हार्डिया का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा, जब उन्होंने लोगों की बदहाली अपनी आंखों से देखी। कार्यक्रम में महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी मौजूद थे, लेकिन हालात देखकर हार्डिया बीच कार्यक्रम से ही उठकर चले गए। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे रोज महापौर निवास जाकर धरना देंगे। हार्डिया ने कहा कि “पहले कभी इंदौर में जलसंकट के इतने भयावह हालात नहीं बने। टंकियां खाली हैं, टैंकर समय पर नहीं पहुंच रहे और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं।”

शहर की पानी की टंकियां अपनी पूरी क्षमता तक भर ही नहीं पा रहीं। पांच से छह मीटर क्षमता वाली टंकियों में महज दो से तीन मीटर तक पानी पहुंच रहा है। इसका सीधा असर हजारों घरों पर पड़ रहा है, जहां नलों में या तो बेहद कम पानी आ रहा है या फिर कई दिनों से सप्लाई पूरी तरह बंद है।

वीणा नगर और आसपास के इलाकों में सोमवार सुबह लोगों का गुस्सा फट पड़ा। बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय रहवासी खाली मटके और बर्तन लेकर सड़कों पर उतर आए। लोगों ने पहले मटके फोड़े, फिर सड़क पर बैठकर जमकर नारेबाजी की। “महापौर पानी दो” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। कांग्रेस नेता अमित पटेल और पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर वाहनों की आवाजाही तक रोक दी।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि न तो नलों में नियमित पानी मिल रहा है और न ही टैंकरों के जरिए पर्याप्त सप्लाई की जा रही है। रहवासियों ने कहा कि वे कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। आखिरकार मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पिछले दो दिनों से कई इलाकों में नर्मदा लाइन के नल भी बंद पड़े हैं। स्कीम नंबर-54, विजय नगर और आसपास के क्षेत्रों में लोग पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। लेकिन यहां भी लोगों को राहत नहीं मिल रही। टैंकर चालक खुलेआम मनमानी वसूली कर रहे हैं। छोटे टैंकर के लिए 800 रुपए से अधिक और बड़े टैंकर के लिए 1000 से 1200 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। कई टैंकर संचालक फोन तक नहीं उठा रहे, जबकि जरूरतमंद लोग घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।

इधर कांग्रेस ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को पूरी तरह विफल बताते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि निगम की नाकामी ने पूरे शहर को जलसंकट की आग में झोंक दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी शहर की लगभग आधी आबादी तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंच पा रहा। जहां पाइपलाइन मौजूद है, वहां भी पानी की सप्लाई बेहद खराब है।

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि नगर निगम में भाजपा के 27 वर्षों के लगातार शासन के बावजूद आखिर हर नागरिक तक नर्मदा जल पहुंचाने की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी। चौकसे ने याद दिलाया कि नर्मदा परियोजना के तीसरे चरण के दौरान बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि यह योजना वर्ष 2040 तक की आबादी की जरूरतें पूरी करेगी। लेकिन आज 2026 में ही इंदौर पानी के लिए त्राहिमाम कर रहा है और सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

एक तरफ प्यास से जूझती जनता, दूसरी तरफ टैंकर माफिया की लूट और ऊपर से प्रशासनिक सुस्ती — इंदौर का जलसंकट अब सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुका है।