
बदलते मौसम से सरकारी अस्पतालों में बढ़ा मरीजों का मर्ज,ओपेड में घंटो लम्बी कतारें
भोपाल। जून के महीने की शुरूआत होते ही मौसम ने इस तरह करवट बदली कि गर्मी से राहत मिलना तो दूर, आम जनता के स्वास्थ पर इसका गंभीर संकट मंडराने लगा है। इस समय मौसमी संक्रमण का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर भागने का सीधा असर अब भोपाल के सभी सरकारी अस्पतालों में दिखने लगा है। इस स्थिति में अस्पतालों के ओपीडी में खड़े होने तक कि जगह नहींं मिल पा रही है। साथ ही मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती ही जा रही है।
मौसम का असर:-मौसम विभाग के अनुसार, इस समय तापमान में अचानक आ रहे उतार- चढ़ाव ने वातावरण का संतुलन पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। दिन के समय में जहाँ तेज धूप और भीषण गर्मी परेशान करती है, वहीं रात होते ही अचानक पारा गिर जाता है। इसके साथ ही शाम कोे चलने वाली धूलभरी हवाओं और हल्की बूंदाबांदी ने हवा में नमी और उमस को अचानक बढ़ा दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले सप्ताह तक मौसम का रूख इसी तरह से बना रहेगा।
बोले- डॉक्टर…सांस और एलर्जी के मरीजों की संख्या में इजाफा
– मौसम के बदलाव का असर अब लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। धूलभरी हवाओं और बारिश के कारण वातावरण में वायरस और बैक्टेरिया तेजी से बढ़े हैं। जिससे सांस और दमा के साथ एलर्जी के मरीजों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। अस्पताल की ओपीडी के मरीजों की संख्या 1500 से बढ़कर लगभग 2000 तक पहुंच गई है।
डॉ. सुमित टंडन, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल
– मौसम में बदलाव के कारण ओपीडी के मरीजों की संख्या 1000 से बढ़कर लगभग 1200 तक पहुंच गई है।
डॉक्टर संजय जैन, अधीक्षक,जय प्रकाश चिकित्सालय अस्पताल
एम्स अस्पताल डॉक्टर कुलदीप गुप्ता ने सारे आकंडे साझा करते हुए बताया कि, एम्स अस्पताल की सामान्य ओपीडी के मरीजों की संख्या में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद यह लगभग 1300 से बढ़कर 1430 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा इस समय तापमान के भारी उतार-चढ़ाव की वजह से लोगों का स्वास्थ्य प्रतितदन बिगड़ता जा रहा है। इस समय स्थिति ऐसी बन चुकी है, कि पर्चा काउंटरों पर सुबह से ही लंबी कतारे देखने को मिल रही है। एम्स अस्पताल की सामान्य ओपीडी के मरीजों की संख्या में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद यह लगभग 1300 से बढ़कर 1430 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा 5 से 14 सााल के बच्चों और 60 से अधिक उम्र के बुजुर्गों में उल्टी- दस्त और वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है। साथ ही डिहाइड्रेशन के मरीजों में भी 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका असर सबसे अधिक 5 से 14 सााल के बच्चों पर पड़ रहा है।
अस्पताल के ओपीडी रिकॉर्ड के आकंडों के अनुसार, तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण मौसमी बिमारियों का ग्राफ तेजी से ऊपर भाग रहा है। मौसम के साथ तेजी से बढ़ने वाली बिमारियां:-
वायरल बुखार:- तापमान में परिवर्तन के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वायरस आसानी से शरीर पर हमला कर देते है। इस कारण लोगो ं को सही होने में समय लग रहा है। इसका पहला लक्षण अचानक सिरदर्द होना और थकान का बढ़ जाना होता है।
डिहाइड्रेशन:- यह शरीर में पानी की कमी से होने वाली सबसे गंभीर और जानलेवा बिमारी है। जिसका पहला लक्षण होठों और मुंह का बार-बार सूखना है।
सर्दी-खासी और जुखाम:- यह ऊपरी श्वसन तंत्र का एक सामान्य वायरल संक्रमण है, जो राइनोवायरस के कारण हो रहा है। यह वायरस हवा के माध्यम से फैलता है। इसका पहला लक्षण गलें में खराश, नाक का लगातार बहना और बार-बार छींक का आना होता है।
बदन दर्द :- यह शरीर में लम्बे समय से बनी बिमारियों के बढ़ने से हो रहा है होता है। जिसका पहला लक्षण मांसपेशियों और जोड़ो में लगातार भारीपन का महसूस होना है।
सांस लेने में तकलीफ:- यह हवा में अचानक प्रदूषण के बढ़ने से फेफड़ो में बढ़ते इन्फेक्शन के कारण होता है। इसका पहला लक्षण सीने में जकड़न महसूस होना।
कमजोरी बढ़ना :-संक्रमण से लगातार लड़ते हुए जब शरीर की ऊर्जा समाप्त हो जाती है, तब शरीर में कमजोरी पैदा हो जाती है। इसका पहला लक्षण लगातार सुस्ती बने रहना है।
अस्पतालों की खराब है स्थिति:-
इन सभी बिमारियों के लगातार तेजी से बढ़ने के कारण जय प्रकाश चिकित्सालय मेें दवाओं का अकाल पड़ गया है। इस समय जेपी हॉस्पिटल में मरीजों को 40% दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही है। इसके अलावा डॉक्टरों को भी ग्लव्स और मास्क नहीं मिल पा रहे है। मरीजों से बातचीत और जांच- पड़ताल करने पर सामने आया कि अस्पताल में 450 जरूरी दवाओं में से मात्र 120 ही उपलब्ध है। ऐसे में मरीज बाहर से महंगे दामों पर दवाईयां खरीदने को मजबूर हो चुके है और डॉक्टरों द्वारा ही मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की सलाह दी जा रही है। अचानक ओपीडी के मरीज बढ़ने की वजह से यहां पर पंजीयन के काउंटर को दो से बढ़ा कर चार कर दिया गया है। साथ ही शाम को इंमरजेंसी में भी डॉक्टरों की संख्या बढ़ा दी गई है, जिससे मरीज को हर समय यही इलाज मिल सके।





