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तो 2023 में सड़क पर वही चेहरे आमने-सामने होंगे, जो फिलहाल सदन में दिख रहे हैं …

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अगर वक्त और हालात सब ठीक रहे तो यह तस्वीर साफ नजर आ रही है कि 2023 के विधानसभा चुनावों में मध्यप्रदेश में भाजपा शिवराज के नेतृत्व और कांग्रेस कमलनाथ के नेतृत्व में ही आमने-सामने होंगीं। यानि जो तस्वीर सदन में नजर आ रही है, वही चेहरे सड़क पर नजर आएंगे। सड़क पर भी हाल ठीक वैसा ही होगा, जैसा सदन में है।
नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में नाथ शिवराज सरकार की आलोचना करते दिखेंगे और अपनी 15 माह की सरकार की सोच और नया मध्यप्रदेश गढ़ने में अवरोध पर आक्रोश और अफसोस बयां करेंगे , तो शिवराज अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाएंगे और कांग्रेस सरकार की 15 माह की विफलताओं पर खुलकर तंज कसेंगे। नाथ नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की दोहरी भूमिका में रहेंगे या एक पद छोड़ने की औपचारिकता कर भी रिमोट अपने ही हाथ में रखेंगे, यह तय होना बाकी है। तो भाजपा में 2023 चुनाव में संगठन की कमान विष्णुदत्त शर्मा के हाथ ही रहेगी, यह फिलहाल तय है।
उत्तरप्रदेश सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद यह लगभग तय हो गया है कि मध्यप्रदेश में शिवराज के नेतृत्व में भाजपा सरकार की उपलब्धियों के साथ पार्टी चुनाव मैदान में उतरेगी। पचमढ़ी में दो दिवसीय अमृत मंथन के भी यही निष्कर्ष निकाले गए। जहां शिवराज ने न केवल मंत्रणा की, बल्कि नए मध्यप्रदेश की नई तस्वीर बनाने के लिए योजनाओं का नया स्वरूप क्या होगा…यह भी तय किया। तो पार्टी के कद्दावर नेताओं ने यह संदेश दिया कि 2023 में शिवराज का नेतृत्व ही नजर आएगा।
चौथी पारी के दो साल पूरा होने पर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम नेताओं ने शिवराज के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को खुलकर सराहा है। शिवराज की कार्यशैली पर मुहर लगाई है। और अब तो सुशासन और विकास की रिपोर्ट ने भी तथ्यों सहित साफ कर दिया है कि प्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले शिवराज उपलब्धियों के मामले में भाजपा शासित और गैर भाजपा शासित राज्यों में सरताज हैं। संकेत यही हैं कि बुलडोजर मामा बन चुके शिवराज के नेतृत्व में ही भाजपा मध्यप्रदेश में 2023 का रण फतह करेगी।
तो कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि कमलनाथ के नेतृत्व में ही पार्टी 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी। शायद यही संदेश देने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों की बैठक की गई और कमलनाथ पर पूर्ण भरोसा भी जताया गया। जिसमें तय हुआ कि पूरे प्रदेश में जनता के मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी जन-आंदोलनों की श्रंखला शुरू करेगी।नाथ के आवास पर आयोजित हुई बैठक में सभी नेताओं ने आम सहमति से कहा कि कमलनाथ को ही 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व करना है और एक-एक नेता उनके नेतृत्व में पूरी ताकत से कांग्रेस की सरकार बनवाने के लिए कटिबद्ध है। बैठक में वह तमाम चेहरे विशेष तौर पर मौजूद थे, जिनके नाम नाथ के एक पद छोड़ने पर विकल्प के रूप में उछलते रहे हैं। इनमें ओबीसी, एससी, एसटी और सामान्य वर्ग सभी के वही दिग्गज मौजूद थे।
तो 2023 विधानसभा चुनाव तक शिवराज की मुख्यमंत्री के रूप में सत्रहवीं साल चल रही होगी, तो कमलनाथ की पंद्रह माह के सीएम कार्यकाल की चर्चा होगी। शिवराज 21 वीं सदी में मध्यप्रदेश के विकास की धुरी बनकर पेश होंगे, तो कमलनाथ बदलाव के सपने को पूरा करने की मंशा प्रकट करेंगे। पर मुकाबला तो दिलचस्प होगा, क्योंकि प्रदेश की राजनीति में टीआरपी वाले यही दो चेहरे हैं। इन दोनों के बीच खड़े ज्योतिरादित्य… शिवराज की आंखों को रास आएंगे तो नाथ की आंखों में खटकेंगे।