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परिवार के भरोसे पर खरा उतरा, सफर के बीच पता चला, अब मैं IPS हो गया

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अविनाश कुमार को तीसरे प्रयास में UPSC में सफलता मिली। वे दो साल से गोरखपुर में DFO के पद पर कार्यरत हैं। वे तब सफर में थे। बीच में मोबाइल फोन की बजी घंटी बजी, जिसने यह खुशी दी। फोन पर उन्हें बताया गया कि उनका चयन IPS (इंडियन पुलिस सर्विस) के लिए हो गया है। UPSC परीक्षा के बारे में उन्होंने किसी को भी जानकारी नहीं दी थी। केवल पत्नी को पता था कि वे UPSC की तैयारी कर रहे हैं। बुधवार सुबह विभागीय काम से प्रयागराज हाईकोर्ट गए थे। शुक्रवार को रास्ते में था, तभी UPSC का परिणाम आ गया है और मेरा चयन हो गया है। मेरी 190 वीं रैंक है।
वे आईआईटी रुड़की से जूलोजिकल इंजीनियरिंग में B Tech हैं। मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले स्थित गोह गांव के रहने वाले प्रारंभिक शिक्षा गांव में करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए घर से निकल गए थे। इस बीच उन्होंने IAS की तैयारी शुरू की। लेकिन, उनका चयन वन विभाग में बतौर DFO के पद पर हो गया। इन सबके बीच उन्होंने हार नहीं मानी। नौकरी के साथ-साथ IAS की तैयारी में जुटे रहे।
अविनाश ने बताया कि दिनभर ऑफिस का काम करने के बाद घर जाकर तैयारी करता था। पढ़ाई के वक्त पत्नी डॉ आकांक्षा का पूरा साथ मिला जिससे कभी व्यवधान नहीं आए। परिवार में दो बड़े भाई हैं। दोनों अभियंता के पद पर तैनात हैं। पिता मोहनसिंह लोक निर्माण विभाग में अवर अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि मां माधुरी सिंह गृहिणी हैं।
परिवार का सपना पूरा
परिवार के लोगों ने एक सपना संजोया था कि बेटा एक न एक दिन IAS या IPS जरूर बनेगा। यह हकीकत में बदल गया। हर कदम पर परिजनों का पूरा सहयोग रहा। स्थिति ऐसी हो गई थी कि DFO की नौकरी और पढ़ाई के बीच पिछले कुछ सालों से पारिवारिक समारोह में शामिल नहीं हो सका। लेकिन, इसके बाद भी परिवार के लोगों ने कभी कोई शिकायत नहीं की।