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Controversial Statement : ऊर्जा मंत्री ने कहा ‘कांग्रेस बिजली संकट के लिए माफ़ी मांगे!’

नेता प्रतिपक्ष ने बिजली संकट को लेकर विशेष सत्र बुलाने की मांग की!

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Bhopal : प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर अपने बेसिरपैर के बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। यही कारण है कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाता और भाजपा को हमेशा बचाव की मुद्रा आना पड़ता है। अब उन्होंने नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के बिजली संकट को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने के लिए लिखे पत्र पर बयान दिया है।

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि 2002 और 2003 में भी जब दिग्विजय सिंह की सरकार थी और प्रदेश में भारी बिजली संकट था और स्थितियां आपात जैसी थी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वे भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और चर्चा करने पर सहमत हैं! लेकिन, पहले कांग्रेस अपने कार्यकाल के लिए माफी मांगे।

मध्यप्रदेश में 2003 से लगातार भाजपा की सरकार है, एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कांग्रेस शासन काल में प्रस्तावित किए गए पावर प्लांटों से भाजपा शासन काल में बिजली की उत्पादन क्षमता बढ़ी है। जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, उस समय इतने पॉवर प्लांट नही थे। जिन पावर प्लांट से वर्तमान में भाजपा सरकार बिजली का उत्पादन कर रही है, वह सब कांग्रेस सरकार द्वारा प्रस्तावित थे।

आंकड़ों के अनुसार इंदिरा सागर बांध, ओंकारेश्वर बांध, सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट प्रस्तावित थे। जिससे आज सिंगाजी थर्मल में 2520 मेगा वाट, इंदिरा सागर से 1000 मेगावाट, ओंकारेश्वर बांध 600 मेगावाट,सेल्दा पॉवर प्लांट से 600 मेगावाट, बिजली उत्पादन हो रहा है।

कांग्रेस का कहना है कि ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर 20 वर्ष पहले की गलतियों को गिनाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे है। जबकि, तोमर को इस बात का आभास नहीं कि 20 साल पहले इन्हीं गलतियों के कारण मध्यप्रदेश की जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया था। उस समय बिजली संकट को लेकर प्रदेश में हाहाकार मचा था, तो इस समय भी वही परिस्थितियां निर्मित है।

इतने बड़े-बड़े पावर प्लांट होने के बाद भी 2 दिन से लेकर 8 से 10 घंटे की लगातार बिजली कटौती हो रही है । प्रदेश में मोमबत्ती युग की वापसी हो चुकी है। देशभर के इनवर्टर निर्माता व्यापार के लिए मध्यप्रदेश की ओर दौड़ रहे है। उसके बाद भी प्रदेश के ऊर्जा मंत्री तोमर दो दशक पहले की सरकार को जिम्मेदार बता रहे हैं वह कहा तक उचित है।