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राधिका ने UPSC में सिलेक्ट होकर कई मिथक खंडित किए!

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कमलेश नाहर की रिपोर्ट

आलीराजपुर की राधिका गुप्ता के कारण आज देश में साक्षरता में सबसे ज्यादा पिछड़ा यह आदिवासी जिला पूरे देश में चर्चित हो गया। अभी तक बिहार के ग्रामीण इलाकों के युवा ही UPSC में सिलेक्ट होते थे, पर इस बार ये ट्रेंड MP में भी दिखाई दिया। राधिका गुप्ता ने UPSC में सफलता पाकर कई मिथक खंडित किए।

पहला तो यह कि वे जिले की पहली महिला है, जिन्होंने अपने दूसरे ही प्रयास में UPSC में 18वीं रेंक हासिल की। राधिका के Civil Service चुनने की मुख्य वजह अपनी दादी की समाज सेवा से प्रेरणा लेना है। नई दिल्ली में अपने प्राइवेट कंपनी में जॉब के दौरान उन्होंने देखा कि ऐसे जॉब करके हम अपनी संतुष्टि भले पा लें, पर जनसेवा नहीं की जा सकती, जो दादी की प्रेरणा थी। यहीं से राधिका ने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया और कड़ी मेहनत कर इतिहास बना डाला।

राधिका की सफलता ने साबित कर दिया कि देश की मुख्य कॉम्पिटिटिव एक्जाम्स में केवल बड़े शहरो के प्रतियोगी ही सफल होते है। राधिका देश के साक्षरता में सबसे निचली पायदान पर स्थित आलीराजपुर जिले से है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा हिंदी मीडियम से और हाईस्कूल से इंग्लिश मीडियम में हुई। उसके बाद इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए राधिका कोटा चली गई। राधिका की सफलता से दूसरा मिथक यह टूट कि बिजनेस क्लास परिवार के बच्चें इस तरह की प्रतियोगिता में सफल नही हो सकते।

जबकि, राधिका के पिता किराना दुकान चलाते है। भाई भी इंजीनियरिंग करने के बाद पारिवारिक कामकाज में हाथ बंटा रहा। राधिका का मानना है कि नई दिल्ली जाकर कोचिंग के बजाय इंदौर जैसे नजदीकी शहर में रहकर भी सफल हुआ जा सकता है।

सफलता का फार्मूला
उनकी युवाओं के लिए 3 टिप्स है। खुद पर विश्वास रखें, ईमानदारी से मेहनत करें और खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से मेंटन रखे।

राधिका का कहना है कि तैयारी के दौरान उन्हें कई बार सेल्फ डाउट हुए। लगा कि वो सही दिशा में तैयारी नही कर पा रही। डर को दूर भगाने के लिए खुद की हॉबी टेबल टेनिस, बैडमिंटन को समय दिया। डर दूर हुआ, साथ ही कांफिडेंस भी बढ़ता गया।कलेक्टर बनकर वे महिला सशक्तिकरण व शिक्षा के क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहती हैं।