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Controversial Statement By MP Damor On Delisting : डीलिस्टिंग को लेकर दिए बयान से सांसद डामोर विवादों मे घिरे!

ईसाई डायोसिस ने आरक्षण को लेकर कही ये बडी बात!

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झाबुआ से श्याम त्रिवेदी की खास खबर

झाबुआ। मध्यप्रदेश के रतलाम- झाबुआ संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद गुमानसिंह डामोर आलीराजुपर में डीलिस्टिंग को लेकर दिए बयान के बाद विवादों मे घिर गए है। सांसद के बयान वाला वीडियो युवक कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने अपने टवीटर हैंडल पर पोस्ट करते हुए सांसद डामोर पर लानत ओर धिक्कार जैसे शब्दों से प्रहार कर दिया।

सांसद के इस बयान पर ईसाई डायोसिस का मानना है कि डीलिस्टिंग को ईसाईयों के साथ जोडकर कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ को हासिल करना चाहते है।

कब और कहां बोला सांसद ने!

आलीराजपुर जिला मुख्यालय पर दो दिन पूर्व (29 अप्रैल) को जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा डीलिस्टिंग को लेकर रैली ओर सभा का आयोजन किया गया था। यहां सांसद डामोर ने बयान देते हुए कहा था कि-यह जो आरक्षण समाप्त होना है, इसके लिए हमें लोकसभा ओर राज्यसभा में बिल पास करवाना पड़ेंगे और बिल पास करवाने के लिए ये वातावरण का निर्माण किया जा रहा है।

इसके पहले भी 1970 मेें भी ऐसे प्रयास हुए थे। परंतु उस समय प्रयास सफल नहीं हो पाए। पर अब ऐसा लग रहा है कि पूरे देश में जनजागृति आई है और जनजागृति के कारण हमको पूरा विश्वास है कि, लोकसभा ओर राज्यसभा में बिल पास हो जाएगा।

यह लिखा है प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष डॉ विक्रांत भूरिया ने

प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष डॉ विक्रांत भूरिया ने बीती रात अपने ट्विटर हैंडल पर भाजपा सांसद गुमानसिंह डामोर के बयान वाला वीडियो शेयर करते हुए लिखा- गुमान सिंह आप स्वयं एसटी की रिजर्व सीट से सांसद है। शर्म आनी चाहिए। लानत और धिक्कार है।

ईसाई डायोसिस ने रखा अपना पक्ष

सांसद डामोर के बयान पर झाबुआ ईसाई डायोसीस के पीआरओ रौकी शाह ने कहा है कि डीलिस्टिंग को ईसाईयों के साथ जोड़कर कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के उददेश्य को प्राप्त करना चाहते है। वास्तव मे यह आदिवासियों के लिए रचा जा रहा एक बहुत बडा षडयंत्र है। डीलिस्टिंग के माध्यम से ना केवल ईसाई लोगों को आरक्षण के लाभ से हटाने की मुहिम है बल्कि अन्य आदिवासी जो अन्य धर्मो का पालन कर रहे हैं, वह भी डीलिस्टिंग के कारण आरक्षण के लाभ से वंचित हो जाएंगे। हमारे संविधान में आदिवासियों के लिए आरक्षण प्राप्त करने की एक परिभाषा है, उस परिभाषा के अंतर्गत ही सभी आदिवासियों को आरक्षण मिला हुआ है और वही संविधान हमें यह बता रहा है कि आदिवासी के किसी भी धर्म को मानने से उसका आरक्षण समाप्त नहीं हो सकता है।