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निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा की, 7 चरणों में होंगे चुनाव, 10 मार्च को मतगणना

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Katni Mayor

New Delhi :  उत्तरप्रदेश में 10 फरवरी को मतदान का पहला चरण, 14 फ़रवरी को दूसरा, 20 फ़रवरी को तीसरा, 23 को चौथा, 27 फ़रवरी को पांचवा, 3 मार्च को छठा और 7 मार्च को सांतवे चरण का मतदान होगा। 10 मार्च सभी राज्यों में मतगणना होगी। रैलियां, रोड शो, साइकिल यात्रा पद यात्रा, नुक्कड़ सभा, विजयी रैली की अनुमति नहीं होगी। सिर्फ वर्चुअल तरीके से पार्टियां चुनाव का प्रचार कर सकेंगी। 15 जनवरी तक सभी तरह की चुनावी यात्राओं पर रोक। डोर टू डोर प्रचार में सिर्फ 5 लोग ही शामिल हो सकेंगे। 15 जनवरी के बाद चुनावी रैलियों के बारे में दोबारा समीक्षा।

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इस बार आयोग ने कोरोना प्रोटोकाल को देखते हुए विज्ञान भवन में अपनी प्रेस कांफ्रेंस की। यहां सोशल डिस्टेंडिंग का पालन आसान है। पांच राज्यों की 690 विधानसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा का ऐलान इस बार के चुनाव कोविड सेफ के आधार पर होंगे। 18.34 करोड़ लोग अपने मताधिकार का उपयोग इस चुनाव में करेंगे। 24.9 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। 2 लाख 15 हज़ार से ज्यादा पोलिंग बूथ बनाया जाए। पोलिंग स्टेशन में 16% का इजाफा किया गया।  1620 पोलिंग स्टेशन सिर्फ महिलाएं संभालेंगी। सभी उम्मीदवार ऑनलाइन नामांकन करा सकेंगे। 18.34 करोड़ मतदाता इस चुनाव में हिस्सा लेंगे। इस बार वर्ल्ड क्लास पोलिंग बूथ बनाने की तैयारी। हर बूथ पर सिर्फ 1250 वोटर होंगे। कोविड सुरक्षा की खातिर स्वास्थ्य  सचिव से कोरोना की स्थिति और सुरक्षा उपायों को लेकर बैठक की गई। कोरोना संक्रमित, दिव्यांग और 80 साल से ऊपर के मतदाता के लिए पोस्टल बैलेट।

उत्तर प्रदेश उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव खर्च की सीमा 40-40 लाख रुपए तय की गई। जबकि, गोवा और मणिपुर में उम्मीदवार 28-28 लाख रुपए खर्च कर सकेंगे। चुनाव में गड़बड़ी की सूचना चुनाव आयोग के ऊपर भी की जा सकेगी।
चुनाव की घोषणा के साथी इन सभी पांच राज्यों में आचार संहिता लागू। मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने बताया कि उत्तर प्रदेश की 403, पंजाब की 117, उत्तराखंड में 70, मणिपुर में 60 और गोवा में 40 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होगा, कोविड के मद्देनजर सुरक्षित चुनाव कराना हमारा लक्ष्य है। चुनाव करवाने वाले सभी अधिकारियों को वैक्सीन का बूस्टर डोज लगवाया जाएगा। चुनाव से जुड़े हर कर्मचारी को कोरोनावायरस इन का बूस्टर डोज लगाया जाएगा। हर चुनाव अधिकारी फ्रंटलाइन वर्कर माना जाएगा।