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Expressway Chaos : मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे अभी पूरा बना नहीं, पर गांव सफर करने लगा! 

दोपहिया वाहन बेखौफ चल रहे, पथराव करने वालों को रोका नहीं जा रहा, नियमों का उल्लंघन  

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Expressway Chaos : मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे अभी पूरा बना नहीं, पर गांव सफर करने लगा! 

खाचरोद से ऋतुराज बुड़ावनवाला की रिपोर्ट

Khachrod : दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर मोटरसाइकिल, स्कूटी, ट्रैक्टर और ऑटो चलाने की अनुमति नहीं है। उसके बावजूद नियमों का उल्लंघन करते हुए दो पहिया वाहन एक्सप्रेस-वे पर दौड़ रहे हैं। बीते डेढ़ वर्षों में दोपहिया वाहनों की चोपहियां वाहनों के साथ हुई भिड़ंत में अनेकों लोगों की मौत भी हो गई। आए दिन दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी हैं। हर-दूसरे तीसरे दिन इस तरह की खबर मिलती रहती हैं। जबकि, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का मध्यप्रदेश खंड सुचारू रूप से चालू नहीं हुआ।

एक्सप्रेस वे का 244 किलोमीटर लंबा हिस्सा झाबुआ, रतलाम व मंदसौर जिले में है। रतलाम जिले में 90, झाबुआ जिले में 50.95 व मंदसौर में 102 किमी से गुजर रहा है। कई जगहों पर रेस्ट एवं सर्विस एरिया का निर्माण किया गया है, जहां पर रुककर लोग फ्रेश हो सकते हैं साथ ही आराम भी कर सकते हैं। यात्री सुविधा के लिए कार पार्किंग, फ्यूल पंप, रेस्टोरेंट, टॉयलेट के लिए भवन तो बनकर तैयार हैं, किन्तु उन्हें चालू नहीं किया गया।

लंबी दूरी के यात्रियों को फ्यूल भरवाने के लिए इंटरचेंज से निकलना पड़ता है तथा खानपान की व्यवस्था नहीं होने पर बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। एक्सप्रेस-वे की बाउंड्री के बाहर किनारों पर पास के ग्राम तलावड़ा के मानसिंह ने खानपान की छोटी सी दुकान खोली है, जहां पर यात्रियों की चाय-पानी की जुगाड़ हो जाती है। दारू पीने वालों और पत्थरबाजों के कारण वे दिन में ही अपनी दुकान खोलते हैं, जबकि एक्सप्रेस-वे के उस पार सांवरिया रेस्टोरेंट नामक दुकान चौबीसों घंटे खुली रहती हैं, जहां पर सुबह 6.30 बजे महिला दुकानदार चाय बनाती है।

एक्सप्रेस-वे पर अनधिकृत यातायात चल रहा है और दुर्घटनाएं हो रही हैं। एक्सप्रेस वे की साइड को अपनी सुविधानुसार काटकर दो पहिया वाहनों से आवाजाही की जा रही है। यहीं नहीं, ये लोग अपने दोपहिया वाहनों पर सवार होकर विपरीत दिशा में भी यात्रा करने से परहेज नहीं करते। गुजरात की और से मध्यप्रदेश के मेघनगर से लगी अनास नदी से मध्यप्रदेश के रतलाम जिले से होकर गुजरने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर खासतौर पर रावटी, शिवगढ़, खवासा जैसे थाना क्षेत्रों में अज्ञात लोगों द्वारा आए दिन वाहनों के ऊपर पत्थर बरसाए जा रहें हैं। जिससे एक्सप्रेस वे पर यात्रा करने वाले यात्रियों में भय गहराया हुआ हैं। झाबुआ, थांदला, रतलाम, सैलाना, धामनोद,नामली, जावरा, खाचरौद जैसे क्षेत्र के जानकार लोग तो शाम 5 बजे के बाद एक्सप्रेस-वे पर यात्रा करने से परहेज करते हैं।

 

वाहनों व यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम नहीं

मंदसौर, रतलाम व झाबुआ जिले के लिए वाहन इस एक्सप्रेस-वे से रोज गुजर रहे है। लेकिन, वाहनों व यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं है। पिछले डेढ़ साल में अनेक बार वाहनों पर पथराव किए गए। बदमाशों द्वारा किए पथराव में अनेक चोपहियां वाहनों को नुकसान हुआ। गत वर्षो में रावटी ब्रिज व शिवगढ़ के ग्राम बायडी तथा झाबुआ जिले से लगे क्षेत्रों में अनेकों बार पथराव की घटनाएं हो चुकी है। एक फरवरी 2024 को पूर्व विधायक दिलीप मकवाना के स्कॉर्पियो वाहन पर रावटी के समीप पथराव किया गया था, जिससे वे बाल-बच गये थे। शिवगढ़ पुलिस ने अज्ञात बदमाशों पर प्रकरण दर्ज किया था, लेकिन पुलिस पथराव करने वालों का पता नहीं लगा पाई।

रतलाम के तत्कालीन एसपी राहुल लोढ़ा ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर रतलाम के पास बढ़ती पथराव की घटनाओं के मद्देनजर यहां पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम के लिए गत जुलाई माह में अलग-अलग पांच स्थानों पर पुलिस चौकियां स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। उनके तबादले के बाद यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा है। थानों में स्टाफ की कमी के चलते पुलिस पर्याप्त पेट्रोलिंग भी नहीं की जा रही। उल्लेखनीय है कि दिल्ली से मुंबई तक एक्सप्रेस-वे के मध्यप्रदेश के 224 किमी के हिस्से में करीब डेढ़ साल से आवागमन शुरू हो गया है।

टोल की दरों में अंतर का कारण 

एंट्री प्वाइंट झाबुआ के थांदला से लगाकर जावरा के भूतेड़ा के एग्जिट गेट तक के लगभग 90 किलोमीटर के सफर के दौरान इस रूट पर बहुत कम यातायात देखने को मिलता है। कम यातायात की एक वजह यह भी सामने आई कि एक्सप्रेस-वे पर टोल रेट बहुत ज्यादा लगता हैं। टोल दरें अलग-अलग पैकेज एरिया की दर से निर्धारित हैं। जैसे कि कहीं पहाड़ काटकर रोड को बनाया गया है, तो उस इलाके से गुजरने की टोल दरें अधिक है। जहां फ्लैट एरिया में निर्माण हुआ, वहां थोड़ी कम हैं।

अगर आप इस एक्सप्रेस-वे से कार या जीप-वैन से यात्रा करते हैं तो आपको प्रति किलोमीटर 3 रुपये का टोल देना पड़ता हैं। उदाहरण के लिए अगर आप 10 किलोमीटर की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 30 रुपए टोल देना होगा। हल्के कमर्शियल वाहनों (एलसीवी) के लिए टोल दरें थोड़ी ज्यादा हैं। इन वाहनों के लिए टोल दर प्रति किलोमीटर 5 रुपये तक है।

इसका मतलब है कि अगर आप 20 किलोमीटर की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 100 रुपये का टोल देना होगा। अगर आप बस या ट्रक से यात्रा करते हैं तो टोल दरें और भी अधिक होती हैं। इन वाहनों के लिए टोल दर प्रति किलोमीटर 10 रुपये होती है। यानी 50 किलोमीटर की यात्रा पर आपको 500 रुपये का टोल देना होगा। भारी कमर्शियल वाहन के लिए टोल दरें प्रति किलोमीटर 12 रुपये होती हैं जबकि बड़े 3 एक्सएल वाहन के लिए यह दर 16 रुपये प्रति किलोमीटर तक होती है। इसका मतलब है कि अगर आप 100 किलोमीटर की यात्रा करते हैं तो भारी कमर्शियल वाहन के लिए आपको 1200 रुपये और बड़े 3 एक्सएल वाहन के लिए 1600 रुपये का टोल देना होता हैंं।

हाईवे पर चढ़ने और उतरने की जगह पर इंटरचेंज टोल लगाए गए हैं। हर 50 किलोमीटर पर एंट्री और एग्जिट के लिए गेट हैं जहां टोल ऑटोमेटिक कट जाता हैं। पूरे एक्सप्रेस-वे पर 30 लेन टोल प्लाजा बनाये गये हैं । एक्सप्रेस-वे पर अधिकतम 120 की स्पीड से वाहन चलते हैं। एक्सप्रेस वे की विशेषता यह है कि कहीं भी टोल गेट नहीं लगे है। सफर के दौरान यात्रियों को बार-बार टोल के लिए रुकना नहीं पड़ता।

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ऑटोमेटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम  

एक्सप्रेस-वे अत्याधुनिक ऑटोमेटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से लेंस है। इस एक्सप्रेस-वे कंट्रोल हाईवे पर रात दिन मॉनिटरिंग होती। हैं। हर 1 किलोमीटर पर 500 मीटर तक की रेंज वाले हाई रेजोल्यूशन कैमरे लगे हैं। हर 5 किलोमीटर पर स्पीड मॉनिटर हो रही हैं। स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ती है तो हाईवे पेट्रोलिंग टीम के पास तत्काल ओवर स्पीडिंग वाहन का फोटो और नंबर पहुंच जाता हैं। ओवर स्पीड वाहनों पर लगे जुर्माने को भी टोल टैक्स के साथ इंटरचेंज से निकलने पर वसूल कर लिया जाता है। इसके लिए रतलाम जिले के जावरा के पास कंट्रोल रूम बनाया गया है। जहां स्पीड मॉनिटरिंग वाले एक्सपर्ट तैनात हैं। उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी गई हैं।

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सुवासरा के फोटोग्राफर एवं साहित्यकार बंसीलाल परमार ने बताया कि हाईवे के आसपास के लोगों के लिए हाईवे की ओर देखना वैसा ही है जैसे आसमान में हवाई जहाज को गुजरते हुए देखना। जैसे ही लोगों को पता चलता है कि गांव के पास से हाईवे गुजरने वाला है, तो उनकी आंखों में विकास का सपना तैरने लगता है। लेकिन हाईवे जब निकला तो अपने साथ कई समस्याएं लाया। कई किसानों के खेत अधिग्रहण में चले गए। मुआवजा चाहे कितना ही मिला,जमीन के एवज में यदि वह जमीन खरीद पाया तो ठीक, नहीं तो उचित निवेश न होने पर सारा धन खर्च कर मजदूर बन जाता है।

किसान व्यापारी नहीं होता। वह लाखों को करोड़ों में नहीं बदल सकता। इस मार्ग पर थादंला, सैलाना, तथा  झाबुआ जिले में किसानों को खेत में जाने का रास्ता नहीं दिया गया, जिससे वह परेशान है। बहुत से लोगों की जमीन का कुछ भाग सड़क के इधर और कुछ भाग उधर रह गया, जिससे मिलों चक्कर काट कर ही वह अपने मवेशियों के साथ खेतों में पहुंच रहा है, जिससे काफी समय ,धन और ऊर्जा खर्च होती हैं।

सरकार का लक्ष्य चंद पूंजीपतियों को पोषित करना है। लोग सोचते कि हाईवे बनने से रोजगार बढ़ेगा, यह दिवास्वप्न है ! हाईवे पर जो होटल आवंटित होगी, वहां कई गुना कीमत पर खाद्य पदार्थ बिकेगे। सड़कों के किनारे के गांवों के ढाबे, चाय की दुकानें बंद हो जाएगी, जिससे अनेकों के समक्ष रोजगार के लाले पड़ जाएंगे।