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इंदौर की स्वच्छता पर संकट: भागीरथपुरा में दूषित पानी से स्वास्थ्य आपदा, 3 की मौत से दहशत, दर्जनों बीमार

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इंदौर की स्वच्छता पर संकट: भागीरथपुरा में दूषित पानी से स्वास्थ्य आपदा, 3 की मौत से दहशत, दर्जनों बीमार

के के झा की खास रिपोर्ट

इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य संकट ने प्रशासन और नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में पीने के पानी में संभावित संदूषण के कारण उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी लक्षणों के साथ अब तक 3 लोगों की मौत की खबर सामने आई है और दर्जनों लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हैं। प्रशासन द्वारा पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

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स्थानीय अधिकारियों तथा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने के बाद हाल के दिनों में कई निवासियों को उल्टी-दस्त जैसी शिकायतें दर्ज हुईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा। 70 वर्षीय नंदलाल पाल समेत क्षेत्र के 3 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हैं और इलाज जारी है। इन मौतों और बीमारी के बीच प्रशासन जांच कर रहा है कि दूषित पानी की आपूर्ति कैसे हुई।

कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने सोमवार रात अस्पताल पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने घोषणा की कि सभी मरीजों का इलाज सरकारी खर्च पर कराया जाएगा और जिन लोगों ने भुगतान कर दिया है, उन्हें राशि लौटाई जाएगी.

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि प्रभावित लोगों को उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखे हैं, और जिलाधिकारी एवं स्वास्थ्य अधिकारी मिलकर जांच जारी रखे हैं। पानी के संदूषित होने के कारणों का पता लगाने के लिए पेयजल के सैंपल विभिन्न स्थानों से लिए गए हैं और प्रयोगशाला में परीक्षण चल रहा है।

प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में नल के पानी की आपूर्ति रोकते हुए टैंकर के माध्यम से सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने त्वरित संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को समुचित और निरंतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और नागरिकों से अपील की है कि वे फिलहाल केवल उबला हुआ या गर्म पानी ही पिएं।
इस बीच लोगों में नाराजगी भी फैल रही है कि स्वच्छता के नाम पर चलाई जा रही पहलों के बीच मूलभूत आवश्यकता पेयजल की गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया गया। कई निवासियों ने शिकायतें पहले भी नगर निगम को दी थीं, लेकिन समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने का आरोप लगाया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मुख्य फोकस मरीजों के प्रभावी उपचार और किसी भी तरह के संक्रमण के फैलाव को रोकने पर है, और जनता को पानी उबालकर पीने की सलाह लगातार दी जा रही है।