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अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में अभिजीत स्मृति साहित्य संवर्धन पुरस्कार समारोह संपन्न

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अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में अभिजीत स्मृति साहित्य संवर्धन पुरस्कार समारोह संपन्न

वर्ष का साहित्य संवर्धन सम्मान कवि नरेन्द्र भावसार को प्रदान किया गया

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट

मन्दसौर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में अभिजीत स्मृति साहित्य संवर्धन पुरस्कार समारोह गजलकार प्रमोद रामावत नीमच, कृषि वैज्ञानिक नरेन्द्रसिंह सिपानी, शिक्षाविद् देवेश्वर जोशी के मुख्य आतिथ्य तथा गीतकार डॉ प्रकाश उपाध्याय जावरा, दादू प्रजापति मनासा, शिक्षाविद् रमेशचन्द्र चन्द्रे के विशेष आतिथ्य तथा जन परिषद संरक्षक डॉ. उर्मिला तोमर, जन परिषद मंदसौर चैप्टर अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल, प्रेस क्लब संरक्षक ब्रजेश जोशी,
पूरावेत्ता एवं इतिहासकार डॉ. कैलाश पाण्डेय, डॉ. स्वप्निल ओझा, दशपुर जागृति संगठन अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र पुराणिक की विशेष उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

इस मौके पर मालवा मेवाड़ और कंठाल क्षेत्र के रचनाकारों कवियों साहित्यकारों ने अपनी प्रतिनिधि रचनाएं प्रस्तुत की।

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दशपुर गौरव गान रचनाकार एवं गीतकार नन्दकिशोर राठौर के पुत्र ‘अभिजीत’ की स्मृति में साहित्य संवर्धन सम्मान प्रतिवर्ष नगर के एक साहित्यकार को देने के निर्णय के अंतर्गत इस वर्ष 2025 का साहित्य संवर्धन सम्मान अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिला अध्यक्ष नरेंद्र भावसार को शाल, श्रीफल व प्रशस्ति पत्र भेंटकर के दिया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए श्री सिपानी ने कहा कि श्री राठौर ने पुत्र अभिजीत की स्मृति को साहित्य से जोड़कर उसे चिरस्थाई बना दिया है। यह राठौर परिवार का साहसिक कदम है जो अनुकरणीय भी है और स्तुत्य भी।

श्री प्रमोद रामावत नीमच ने कहा कि इस प्रकार अपने दुख को साहित्य के संवर्धन सम्मान से जोड़कर साहित्य संवर्धन के लिये एक उदाहरण श्री राठौर ने प्रस्तुत किया है जो प्रतिवर्ष नवीन साहित्यकारों के लिये साहित्य रचना की प्रेरणा बनेगा। श्री रामावत के अपनी गजल के शेर सुनाते हुए कहा कि ‘‘आप मजहब और दंगों की सियासत किजिए शर्त इतनी है फकत बस्तियों से पुछकर’’।

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डॉ. प्रकाश उपाध्याय जावरा ने ‘‘राम नाम गाता हूॅ’’ गीत सुनाकर वातावरण को राममय कर दिया। फजल हयात जावरा ने ‘‘ये जुगनु देखिये छोटा बहुत है, अंधेरों से मगर लड़ता बहुत है’’ व आशा रानी उपाध्याय ने ‘‘मोजे दुश्मन हो गई मझधारमें, दम अभी तक है पतवार में’’ सुनाया। प्रतापगढ़ राजस्थान के सुरेन्द्र सुमन, भगवती प्रसाद गेहलोत ने भी सहभागिता की।

इस अवसर पर नीमच, मंदसौर, रतलाम, जावरा, मनासा प्रतापगढ़ एवं आसपास केे साहित्यकारों द्वारा भी काव्य पाठ किया गया जिसमें मनोहर मधुकर, रमेश मनोहरा, श्याम भाटी, गोपाल त्रिपाठी, दादू प्रजापति, वंदना भाटी, योगेश शर्मा, सुरेंद्र सुमन कुंवर, प्रताप बेचैन, नरेंद्र भावसार, श्रीमती संजना राठौर, भगवती प्रसाद गहलोत, पंकज शर्मा तरुण, मुकेश आनंद भावसार द्वारा काव्य पाठ किया गया। जन परिषद मंदसौर चैप्टर अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल, प्रेस क्लब संरक्षक ब्रजेश जोशी, शिक्षाविद देवेश्वर जोशी ने भी संबोधित किया।

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प्रारंभ में वंदना योगी नीमच ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सभी कविगणों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में लेखकों की प्रकाशित पुस्तकों का विक्रय स्टॉल भी लगाया गया। संचालन सूत्रधार नरेन्द्र त्रिवेदी ने किया व आभार नन्दकिशोर राठौर ने माना।

इस अवसर पर पिपलिया मंडी के आर्टिस्ट संगीतकार ललित कनेरिया ने नन्दकिशोर राठौर का पेंसिल स्कैच चित्र फ्रेम भेंट किया। राजाराम तंवर, इंजी. दिलीप जोशी, सुनील व्यास, हस्ती सांखला ने अभिजीत साहित्य पुरस्कार प्राप्त कवि नरेन्द्र भावसार का पुष्पमाला पहनाकर सम्मान किया।

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इस अवसर पर मंदसौर नीमच जावरा सहित अन्य स्थानों से कवि साहित्यकार लेखक शामिल हुए । रचनाकार डॉ. नीलेश नील, आर्टिस्ट संगीतकार ललित कनेरिया, फिल्म डायरेक्टर निर्देशक प्रदीप शर्मा, फिल्म निर्माता संजय भारती मनीष मनी शामगढ़ वाला, हेमंत कच्छावा, अर्जुन राव मोर, अजीजुल्लाह खान, कन्हैयालाल सोनगरा, ओमप्रकाश मिश्रा, राजेंद्र पोरवाल, डॉ देवेंद्र पुराणिक, स्वप्निल ओझा, इतिहासकार श्री कैलाशचन्द्र पांडे, दिलीप सेठिया, शंभू सिंह राठौड़, लालबहादुर श्रीवास्तव, पंकज पवार, प्रमोद सेठिया, उषा कुमावत, अजय डांगी, चंदा डांगी, सीमा शर्मा, वंदना त्रिवेदी, विजय अग्निहोत्री, सुरेंद्र शर्मा, सुधा कुर्मी, ललित बटवाल, राहुल राठौर, राजेंद्र तिवारी, राजकुमार अग्रवाल, धु्रव जैन सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं गणमान्य जनों की उपस्थिति रही।

दिवंगत श्री अभिजीत राठौर की स्मृतियों को नमन करते हुए मौन रखते हुए सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित की गई।