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IT Verification Operation: आयकर विभाग ने फर्जी छूट और कटौती के दावों पर कसा शिकंजा, 150 जगहों पर बड़ा सत्यापन अभियान शुरू

पिछले साल करीब 40,000 टैक्सपेयर्स ने गलत दावे वापस लेकर 1,045 करोड़ रुपये जमा किए

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IT Verification Operation: आयकर विभाग ने फर्जी छूट और कटौती के दावों पर कसा शिकंजा, 150 जगहों पर बड़ा सत्यापन अभियान शुरू

नई दिल्ली: आयकर विभाग ने देशभर में फर्जी टैक्स डिडक्शन और छूट के दावों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। विभाग ने 14 जुलाई से 150 से ज्यादा स्थानों पर व्यापक सत्यापन कार्रवाई शुरू की है, जिसमें उन व्यक्तियों और संस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है जो इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में ग़लत छूट और कटौती के दावे कर रहे थे। यह कार्रवाई इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत मिलने वाले टैक्स लाभों के दुरुपयोग की विस्तृत जांच के बाद शुरू हुई है।

जांच में सामने आया है कि कुछ प्रमाणित ITR प्रिपेयरर और बिचौलिए संगठित गिरोह बनाकर फर्जी डिडक्शन और छूट के दावे दाखिल कर रहे थे। कई मामलों में फर्जी TDS रिटर्न दाखिल कर रिफंड भी लिया गया। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई तलाशी और जब्ती की कार्रवाई में ऐसे फर्जी दावों के पुख्ता सबूत मिले हैं।

विभाग ने फर्जीवाड़े की पहचान के लिए थर्ड पार्टी डेटा, ग्राउंड इंटेलिजेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल किया। विश्लेषण में पाया गया कि सेक्शन 10(13A), 80GGC, 80E, 80D, 80EE, 80EEB, 80G, 80GGA, 80DDB आदि के तहत भारी मात्रा में फर्जी कटौती और छूट के दावे किए गए हैं। इसमें MNCs, PSU, सरकारी कर्मचारी, शैक्षणिक संस्थान और उद्यमी भी शामिल हैं। टैक्सपेयर्स को अधिक रिफंड का लालच देकर स्कीम में फंसाया गया।

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आयकर विभाग ने ‘ट्रस्ट टैक्सपेयर्स फर्स्ट’ नीति के तहत स्वैच्छक अनुपालन को बढ़ावा दिया है। पिछले साल करीब 40,000 टैक्सपेयर्स ने गलत दावे वापस लेकर 1,045 करोड़ रुपये जमा किए, लेकिन कई अब भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अब विभाग कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है—फर्जी दावे करने वालों पर पेनल्टी और अभियोजन भी लगाया जाएगा।

टैक्सपेयर्स को सलाह दी गई है कि वे अपनी जानकारी सही भरें और किसी भी अनाधिकृत एजेंट या बिचौलिए के बहकावे में न आएं। विभाग ने चेतावनी दी है कि ऐसे फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी जांच जारी रहेगी।

यह अभियान न सिर्फ टैक्स सिस्टम की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए है, बल्कि टैक्सपेयर्स को जागरूक करने और टैक्स चोरी पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ा कदम है।