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Kharge Win : खड़गे AICC अध्यक्ष चुने गए, थरूर बुरी तरह हारे!

24 साल बाद कोई गांधी-परिवार से बाहर का अध्यक्ष चुना गया   

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Kharge Win : खड़गे AICC अध्यक्ष चुने गए, थरूर बुरी तरह हारे!

New Delhi : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे विजयी रहे! उन्होंने सांसद शशि थरूर को बड़े अंतर से चुनाव में शिकस्त दी। खड़गे को 7897 वोट मिले, शशि थरूर के समर्थन में सिर्फ 1072 वोट पड़े। 416 वोट अमान्य घोषित किए गए। नतीजे घोषणा के बाद शशि थरूर ने मल्लिकार्जुन खड़गे को बधाई देते हुए कहा कि कांग्रेस का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनना सम्‍मान की बात है।

24 साल बाद गांधी परिवार के बाहर का कोई नेता देश की सबसे पुरानी पार्टी का अध्यक्ष चुना गया है। इससे पहले सीताराम केसरी गैर गांधी अध्यक्ष रहे थे। कांग्रेस पार्टी के 137 साल के इतिहास में 6ठी बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ है। शशि थरूर के पोलिंग एजेंट ने चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में गड़बड़ी की बात कही थी। इस बारे में मधुसूदन मिस्त्री को चिट्ठी भी लिखी गई थी। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 17 अक्टूबर को विभिन्‍न राज्‍यों में बने पोलिंग बूथ पर वोट डाले गए थे। 17 अक्टूबर को हुई वोटिंग में कुल 9385 डेलिगेट्स ने वोट डाले थे। कांग्रेस के चुनाव पदाधिकारियों ने 96% तक वोटिंग होने का दावा किया था।

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कांग्रेस में इससे पहले अध्यक्ष पद के लिए चुनाव 1939, 1950, 1977, 1997 और 2000 में चुनाव हुए थे। 2000 के चुनाव में सोनिया गांधी ने जितेंद्र प्रसाद को हराकर अध्यक्ष पद हासिल किया था। गांधी परिवार से करीबी और कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थन के चलते खरगे की दावेदारी पहले ही मजबूत मानी जा रही थी।

बुधवार सुबह कांग्रेस कार्यालय में काउंटिंग की प्रक्रिया शुरू हुई। सभी प्रदेशों से आए मतपत्रों को एक साथ मिलाकर मतगणना की गई। कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के एक पदाधिकारी ने बताया कि मतगणना सुबह 10 बजे से आरंभ हुई। उसके लिए सारी तैयारी पहले से पूरी कर ली गई थी। उन्होंने कहा कि देश के सभी मतदान केंद्रों से मतपेटियां कांग्रेस मुख्यालय लाई गईं। इन्हें कांग्रेस मुख्यालय के भीतर बने स्ट्रांग रूम में रखा गया और पार्टी मुख्यालय में ही मतगणना भी हुई।

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कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में मुकाबला मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच हुआ। दोनों तरफ से 5-5 एजेंटों ने मतगणना की निगरानी की। दोनों पक्षों से 2 एजेंट रिजर्व में रखे गए थे। इसके अलावा दोनों नेताओं के समर्थक भी कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। गांधी परिवार से करीबी और कई वरिष्ठ नेताओं के समर्थन के चलते खड़गे की दावेदारी पहले से ही मजबूत मानी जा रही थी।

80 वर्षीय खड़गे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले के वारावत्ती इलाके में एक किसान परिवार में हुआ था। खरगे गांधी परिवार के शुरू से वफादार रहे हैं। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले खड़गे ने एक लंबी पारी यूनियन पॉलिटिक्स की भी खेली। साल 1969 में वह एमएसके मिल्स एम्प्लॉईज यूनियन के कानूनी सलाहकार बन गए। वे संयुक्त मजदूर संघ के एक प्रभावशाली नेता थे, जिन्होंने मजदूरों के अधिकारों के लिए किए गए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया।

राजनीति की शुरुआत

मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुलबर्गा के नूतन विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और गुलबर्गा के सरकारी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। फिर गुलबर्गा के ही सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वकालत करने लगे। साल 1969 में उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा और 1972 में पहली बार कर्नाटक की गुरमीतकल असेंबली सीट से विधायक बने। खड़गे गुरमीतकल सीट से 9 बार विधायक चुने गए।

कर्नाटक में कई बार मंत्री रहे

इस दौरान उन्होंने गुंडू राव, एसएम कृष्णा और वीरप्पा मोइली की सरकारों में विभिन्न विभागों में मंत्री का पद भी संभाला। वे दो बार गुलबर्गा से कांग्रेस के लोकसभा सांसद भी रहे हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से संबंधित भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे 2007 में हुए आम चुनाव में कर्नाटक के गुलबर्गा चुनाव क्षेत्र से 15वीं लोकसभा के लिए सदस्य निर्वाचित हुए थे।