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Mandsaur News: कथक देश की प्राचीन और परंपरागत नृत्य विधा, नृत्य के साथ भावाभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम – अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्य डांसर सम्राट चौधरी

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Mandsaur News: कथक देश की प्राचीन और परंपरागत नृत्य विधा, नृत्य के साथ भावाभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम – अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्य डांसर सम्राट चौधरी

मंदसौर म्यूज़िक कॉलेज में कथक कार्यशाला आयोजित

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट

मंदसौर। हमारे देश की प्राचीन और परंपरागत संस्कृति में नृत्य संगीत कला बहुत महत्वपूर्ण स्थान रहा है ,कालांतर में राजा महाराजाओं ने भी इन कलात्मक विधाओं को प्रश्रय दिया और आगे बढ़ाया, आज भी देश काल परिस्थितियों के बदलाव के बाद इसका महत्व कम नहीं हुआ है यह कहना है अंतरराष्ट्रीय कथकनृत्य कलाकार डॉ सम्राट चौधरी का, यह कथन आपने मंदसौर के लता मंगेशकर संगीत महाविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय कथक कार्यशाला “नृत्य प्रवाह” के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किये।

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कथक नृत्यकार डॉ सम्राट चौधरी ने इस मौके पर बताया कि कथकनृत्य शास्त्रीय विधा है इसका आशय कथाओं को नृत्यों के माध्यम से प्रस्तुत करना। इसका इतिहास भी प्राचीन है और वेदों, पुराण, रामायण, महाभारत आदि ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है। कथकनृत्य में पैरों की गतिशीलता अधिक और तीव्रता के साथ प्रदर्शित होती है, कथा को शारिरिक भाषा से अभिव्यक्ति दी जाती है। उत्तर भारत के सभी प्रान्तों के साथ सम्पूर्ण भारत में कथक नृत्य प्रचलित है।

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डॉ चौधरी के अनुसार मुख्य रूप से कथकनृत्य के जयपुर, लखनऊ और वाराणसी घरानों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। प्रशिक्षण केन्द्र, संगीत महाविद्यालय, नाट्यकला केंद्र पर कथकनृत्य सिखाया जा रहा है और इसमें बालिकाओं, युवतियों, महिलाओं के साथ युवक व पुरुषों में भी अच्छी रुचि देखने में आ रही है।

कथकनृत्य कार्यशाला नृत्य प्रवाह शुभारंभ अवसर पर जनपरिषद अध्यक्ष डॉ घनश्याम बटवाल, मानव अधिकार आयोग मित्र श्री ब्रजेश जोशी, केंद्रीय विद्यालय प्रिंसिपल श्रीमती नीलांजनी प्रसाद, वरिष्ठ पत्रकार श्री महावीर प्रकाश अग्रवाल अतिथि रहे।

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आरंभ में डॉ सम्राट चौधरी एवं अतिथियों ने सरस्वती चित्र पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया।

स्वागत उद्बोधन एवं परिचय संगीत महाविद्यालय जनभागीदारी समिति अध्यक्ष श्री नरेन्द्र कुमार त्रिवेदी ने देते हुए जानकारी दी कि डॉ सम्राट चौधरी मूलतः त्रिपुरा के हैं और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा संगीत महाविद्यालय में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। डॉ चौधरी श्रीलंका, नेपाल के अलावा मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, भुबनेश्वर, रायपुर, भोपाल, उज्जैन सहित देशभर में प्रस्तुतियां दे चुके हैं। साथ ही राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री निवास एवं संगीत समारोह में भी कथकनृत्य प्रस्तुत किये हैं।

आपने कला गुरु पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज के निर्देशन में हुई कथकनृत्य कार्यशाला में प्रशिक्षण लिया और प्रख्यात नृत्यांगना प्रो. मांडवी सिंह के सानिध्य में नृत्यों में प्रवीणता हांसिल की और कथकनृत्य में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की।
श्री त्रिवेदी ने जानकारी दी कि डॉ सम्राट चौधरी ने कथकनृत्य विधा में पी एच डी उपाधि प्राप्त कर सारे देश के विभिन्न अंचलों में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। इसी कड़ी में मंदसौर संगीत महाविद्यालय की कथकनृत्य कार्यशाला में प्रशिक्षण दे रहे हैं।

लता मंगेशकर संगीत महाविद्यालय प्रिंसिपल डॉ उषा अग्रवाल ने कथकनृत्य कलाकार डॉ चौधरी का स्वागत किया और कार्यशाला में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बालिकाओं, युवतियों से परिचय कराया।

कार्यशाला शुभारंभ अवसर पर संगीतज्ञ निशांत शर्मा, अतुल साकेत, दीपक राव, श्रीमती सन्नाली शर्मा, राजू गंधर्व आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम संचालन डॉ अल्पना गांधी ने किया।