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Memories:सेहमत कोई कहानी नहीं है… एक लड़की थी!

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Memories:सेहमत कोई कहानी नहीं है… एक लड़की थी!

● एक लड़की थी…
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ती थी।
क्लासिकल डांस, वायलिन, और सपनों में खोई रहती थी।
एक आम ज़िंदगी थी… जब तक एक फ़ोन कॉल ने सब कुछ बदल नहीं दिया।
● “बेटा, आख़िरी बार मिल लो…”
उसके पिता, हिदायत ख़ान (काल्पनिक नाम), RAW के एजेंट थे।
कैंसर से जूझ रहे थे।
उन्होंने अपनी आख़िरी सांसों में एक जिम्मेदारी दी —
देश के लिए जासूसी करनी है… पाकिस्तान जाकर।
● और वो चली गई।
पढ़ाई छोड़ दी।
शादी कर ली — पाकिस्तानी ब्रिगेडियर के बेटे से।
इकबाल उनका पति बना…
पर उनकी असली पहचान बनी भारत की आंख।
● सेहमत अब दुश्मन के घर की बहू थी।
फौजी क्वार्टर्स में रह रही थी…
बच्चों को नृत्य सिखा रही थी…
पर हर स्माइली के पीछे छिपी थी एक रिपोर्ट —
जो Morse Code में भारत भेजी जाती थी।
● 1971 की लड़ाई से पहले का वक़्त था।
भारत का INS Vikrant बंगाल की खाड़ी में था…
पाकिस्तान का प्लान था — उसे PNS Ghazi से उड़ाने का।
पर सेहमत ने सुन लिया।
सूचना भेजी गई…
ग़ाज़ी समुद्र में डूबा दी गई।
● भारत जीत गया।
पर सेहमत हार गई।
अब शक शुरू हुआ…
अब्दुल — घरेलू नौकर, मार दिया गया।
पति — इक़बाल, मारा गया।
देवर — मेहबूब, जिसने सेहमत के लिए केक मंगवाया था…
उसे भी मारना पड़ा।
● मिशन पूरा हुआ।
देश बच गया।
पर सेहमत टूट गई।
वापसी हुई…
पर वो लड़की जो किसी वक़्त वायलिन बजाया करती थी,
अब गुमनाम पंजाब के एक गांव में सेवा करती रही।
ना मेडल मिला…
ना सम्मान पत्र…
ना सेल्फी, ना पोस्टर…
बस एक उपन्यास — Calling Sehmat
और बाद में एक फिल्म — Raazi।
● सेहमत कोई कहानी नहीं है…
वो एक आइना है — जिसमें हम सबको देखना चाहिए।
देशभक्ति सिर्फ़ मंच से बोलने में नहीं होती।
वो उस लड़की में थी —
जिसने किसी मंच पर नाचने के बजाय,
दुश्मन के आंगन में जान हथेली पर रख दी।
● सेहमत, आप ज़िंदा नहीं…
पर आपकी ख़ामोशी, आज भी सबसे ऊंचा नारा है देश जितना हमारा है उतना ही ये देश तुम्हारा है जय हिंद
एक फिल्म — Raazi।–अंजू शर्मा की वाल से {अपूर्व भारद्वाज की पोस्ट ]