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उपहारों और सामाजिक क्रांति का नया साल…

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उपहारों और सामाजिक क्रांति का नया साल…

नए साल में मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेशवासियों के लिए उपहारों का पिटारा खोल दिया है। अलग नजरिए से देखने वाले सरकार के इस प्रयास को चुनावी साल का नाम भी दे सकते हैं। पर जिस काम से गरीब जनता और अलग-अलग वर्गों की भलाई हो, वह काम सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय तो माने ही जाएंगे। 4 जनवरी 2023 का दिन मध्यप्रदेश के इतिहास में क्रांतिकारी साबित होने वाला है। मुख्यमंत्री भू-अधिकार योजना की शुरुआत टीकमगढ़ जिले से होने जा रही है। इसके तहत दस हजार से ज्यादा परिवारों को मानक तौर पर 600 वर्ग फीट जमीन का पट्टा उपहार में देना एक सामाजिक क्रांति का आगाज है। हर जिले में यदि औसत दस हजार गरीबों को रहने के लिए जमीन उपहार में मिलती है, तो पांच लाख से ज्यादा परिवारों का जीवन बदल जाएगा। जमीन का अधिकार मिलने से दूसरी योजनाओं का लाभ मिलेगा और जीवन की गाड़ी दौड़ने लगेगी। निश्चित तौर पर सरकार के इस प्रयास से लाखों परिवारों में उल्लास का वातावरण बनने वाला है। इसके साथ ही सरकार ने मंगलवार को नए साल की पहली कैबिनेट बैठक में भी जो फैसले लिए हैं, वह भी तारीफ के काबिल हैं। चाहे मेडिकल कॉलेज में पीजी सीट बढ़ाने की बात हो या फिर सीएम राइज विद्यालयों के लिए भारी भरकम राशि की स्वीकृति की, सभी फैसले सर्वजन हिताय का संदेश दे रहे हैं।

तो सबसे पहले बात करते हैं भू-अधिकार की। कैबिनेट बैठक के पहले मुख्यमंत्री चौहान ने मंत्रिमंडल के साथियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी कि मध्यप्रदेश सरकार नए साल पर नई सौगात देने जा रही है। सरकार गरीबों के लिए भूखंड उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री आवासीय भू अधिकार योजना का 4 जनवरी 2023 को टीकमगढ़ से शुभारंभ होगा। यह दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा। उन्होंने योजना के पीछे अपना अनुभव बताया कि मैं टीकमगढ़ गया था तो लोगों ने बताया कि घर मे रहने के लिए जगह नहीं है। तब हमने कल्पना की थी कि ऐसी योजना लागू करेंगे जिससे लोगों का अपना भूखंड हो। इसी क्रम में 4 जनवरी 2023 को टीकमगढ़ जिले के 10 हज़ार 500 लोगों को 120 करोड़ की लागत के भूखंड वितरित करेंगे। यह पट्टा पति पत्नी के नाम पर होगा। खास बात यह है कि इसमें कोई प्रीमियम नहीं लगेगा। नये साल में गरीबों को नई सौगात मिलेगी। भूखंड का मॉडल साइज 600 वर्ग फीट और स्थानानुसार तय किया जाएगा। टीकमगढ़ जिले से शुभारंभ,बाद में सभी जिलों में यह योजना क्रमशः जारी रहेगी। निश्चित तौर पर गरीबों को यह सौगात निराली है।

मंगलवार को कैबिनेट से पहले से जो फील गुड की शुरुआत हुई तो बाद तक जारी रही। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में 45 सीएम राइज विद्यालयों के लिये 1807 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रदेश में सीएम राइज योजना के प्रथम चरण में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 275 स्कूल विकसित किये जा रहे हैं। प्रदेश में कुल 9 हजार 200 सीएम राइज स्कूलों का निर्माण किया जाना है। इसकी मंत्रि-परिषद से सैद्धांतिक स्वीकृति जुलाई, 2021 में जारी की जा चुकी है। इसमें से प्रथम चरण में 370 स्कूलों का निर्माण हो रहा है, जिनमें 275 स्कूल शिक्षा विभाग में तथा शेष 95 स्कूल जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत निर्मित हो रहे हैं। पूर्व में मंत्रि परिषद द्वारा 2 हजार 660 करोड़ रूपए की लागत के 73 स्कूलों को स्वीकृति दी जा चुकी है। अगर यह योजना उम्मीदों पर खरी उतरी तो शिक्षा क्रांति का रूप लेकर रहेगी।

अगला फैसला था चिकित्सा महाविद्यालय इन्दौर, ग्वालियर, जबलपुर तथा रीवा में 433 नई पीजी सीट वृद्धि का। चिकित्सा महाविद्यालय इन्दौर के लिए 192 करोड़ 24 लाख रूपये, चिकित्सा महाविद्यालय ग्वालियर के लिए 62 करोड़ 82 लाख रूपये, चिकित्सा महाविद्यालय जबलपुर के लिए राशि 100 करोड़ 66 लाख रूपये तथा चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के लिए 82 करोड़ 68 लाख रूपये, इस प्रकार कुल राशि 438 करोड़ 40 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। चिकित्सा महाविद्यालय, इन्दौर, ग्वालियर, जबलपुर तथा रीवा के विभिन्न विभागों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए पीजी सीट्स की वृद्धि होने से प्रदेश को प्रत्येक वर्ष अतिरिक्त संख्या में विषय-विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हो सकेंगे। तो यह स्वास्थ्य क्रांति की तरफ एक कदम माना जा सकता है।

तो अगला फैसला था जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग प्रतिष्ठित संस्थाओं से संभाग स्तर पर दिये जाने के लिए योजना का अनुमोदन एवं ऑफलाइन कोचिंग को प्रतिवर्ष और ऑनलाइन कोचिंग पायलेट प्रोजेक्ट में आगामी 4 वर्षों के संचालन के लिए राशि स्वीकृत करने का। और इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों के निर्वाचन में आम सहमति और निर्विरोध निर्वाचन के प्रोत्साहन के लिये पुरस्कार राशि में वृद्धि के फैसले पर मुहर लग गई ताकि बड़ी सामाजिक लोकतांत्रिक क्रांति आकार ले सके। तो अगला फैसला था 23 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के सरपंचों के मानदेय में वृद्धि का। सरपंचों का मानदेय 1,750 से बढ़ा कर 4,250 रूपये प्रतिमाह किया जाएगा।

और भी फैसले हुए नए साल की पहली कैबिनेट बैठक में और सभी सौगात देने वाले हैं। इनमें सरकार का सबसे बड़ा फैसला गरीबों को भू अधिकार देने वाला साबित होगा, जिसकी शुरुआत टीकमगढ़ जिले से 4 जनवरी को होने जा रही है। गरीबों के हित का यह फैसला इतिहास रचेगा, इसमें कोई संशय नहीं है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसके लिए बधाई के पात्र हैं। उपहारों और सामाजिक क्रांति का सिलसिला नए साल में जारी रहे, यही कामना है…।