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अब ऐसी कार्यवाही की जरूरत है सरकार कि ऐसी कोई दूसरी घटना न हो…

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अब ऐसी कार्यवाही की जरूरत है सरकार कि ऐसी कोई दूसरी घटना न हो…

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में संचालित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए कई विस्फोटों के बाद लगी भीषण आग में 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि  करीब दो सौ लोगों के घायल होने की खबर है। हरदा के बैरागढ़ इलाके में मगरधा रोड के करीब एक आवासीय बस्ती है और यहां एक अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालित थी। जिसमें विस्फोटों के साथ भीषण आग लगी जिसने आसपास के दर्जनों मकानों को चपेट में ले लिया। इसके साथ ही घायलों के इलाज के लिए सरकारी प्रयासों की शुरुआत हो गई। विपक्ष ने भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई और मृतकों के परिवार को एक करोड़ प्रति व्यक्ति मुआवजा और घायलों को पचास लाख मुआवजा देने की मांग की। दरअसल करीब-करीब हर साल ही अवैध पटाखा फैक्ट्रियों और दुकानों में आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। और हर साल ही सत्ता पक्ष और विपक्ष की भूमिका लगभग तय है। सरकार जांच कमेटी बनाती है, मुआवजा देती है, घायलों का इलाज करवाती है और दोषियों को सबक सिखाने का दम भरती है। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने तक ही लोग ऐसी घटनाओं और मौतों को जेहन से निकालकर तरोताजा होकर अगली दुर्घटना का बेसब्री से इंतजार करने लगते हैं। सरकार भी अपनी व्यस्तताओं के बीच‌ ऐसी किसी घटना को याद नहीं रख पाती। नौकरशाहों की सेहत पर शायद ही ऐसी घटनाओं और मौतों से कोई फर्क पड़ता हो! और सभी को ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के घटित होने और इसमें होने वाली मौतों पर दु:ख जताने की आदत पड़ गई है। पर असल दु:ख उन परिवारों तक सिमटकर रह जाता है, जिनके जीवन में यह दिन हमेशा के लिए अंधेरा भरकर रफूचक्कर हो जाता है।
इस बार भी पटाखा फैक्ट्री में आगजनी मामले पर प्रदेश कांग्रेस ने जांच कमेटी बनाई है। इस जांच कमेटी के सदस्य रामू टेकाम जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात की। उन्‍होंने मृतकों को 1 करोड़ रुपये और घायलों को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। भोपाल के हमीदिया अस्‍पताल में भर्ती घायलों को देखने पहुंचे मुख्‍यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब तक 11 लोगों की मृत्‍यु की सूचना है। यहां भोपाल में एक व्‍यक्ति की मृत्‍यु हुई, दो घायलों का ऑपरेशन हो रहा है जबकि 9 अन्‍य घायलों की हालत स्थिर है। उन्‍होंने कहा कि हम दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। ऐसी कार्रवाई होगी कि लोग याद रखेंगे।
यही उम्मीद है मध्यप्रदेश में अवैध पटाखा फैक्ट्रियों का कारोबार पूरी तरह बंद कराने में सरकार को सफलता प्राप्त हो। और ऐसी कार्यवाही हो कि लोग याद रखें। क्योंकि अब तक यही होता रहा है कि घटना के बाद कड़ी कार्यवाही की बात होती है और हर जिले में सख्ती बरते जाने की उम्मीद पैदा होती है। पर चंद दिनों बाद सब वादे और सरकारी इरादे कहीं गुम हो जाते हैं और अगली दुर्घटना की भनक भी नहीं लग पाती। अक्टूबर 2023 में दमोह में बस्ती के बीच अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग लगी थी और कई मौतें हुईं थीं। 2022 में मुरैना जिले में भी ऐसी ही घटना हुई थी। 2017 में बालाघाट जिले में इसी तरह के विस्फोट में 25 मौतें हुईं थीं, तब वहां कलेक्टर भरत यादव थे जो वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सचिव हैं। उस साल इंदौर और दतिया में भी ऐसी दुर्घटनाएं और मौतें हुईं थीं। मई 2014 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन के पास बड़नगर में पटाखा फैक्ट्री में लगी आग के कारण करीब 15 लोगों की मौत हुई थी।
बात वही कि कार्यवाही ऐसी हो, जिसे लोग याद रखें। वरना अवैध पटाखा फैक्ट्रियों में आग लगती रहेगी और वैध पटाखा फैक्ट्री में भी नियम-कानून के पालन के अभाव में ऐसी घटनाएं घटित होती रहेंगीं और दिल को दहलाती रहेंगीं। इसीलिए अब ऐसी कार्यवाही की जरूरत है सरकार कि कोई दूसरी दुर्घटना सरकारी लापरवाही के चलते घटित न हो और मौतों का ऐसा ह्रदय विदारक मंजर देखने को हम अभिशप्त न हो पाएं…।