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Promotion Rules 2025 : प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन की तैयारी, दक्षता के आधार पर आरक्षण!

किसी संवर्ग में प्रतिनिधित्व आरक्षण की तय सीमा से अधिक है, तो यह कम भी होगा!

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Promotion Rules 2025 : प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन की तैयारी, दक्षता के आधार पर आरक्षण!

 

Bhopal : कैबिनेट से पदोन्नति नियम 2025 को मंजूरी मिलने के 9 साल बाद अब अधिकारियों-कर्मचारियों के पदोन्नति की तैयारी शुरू हो गई। सबसे पहले मंत्रालय में अधिकारी कर्मचारी पदोन्नत किए जाएंगे। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग वरिष्ठता के हिसाब से सूची तैयार कर रहा है। जानकारी के अनुसार प्रत्येक संवर्ग में प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर इसका निर्धारण होगा। यदि किसी संवर्ग में प्रतिनिधित्व आरक्षण की तय सीमा से अधिक है तो यह कम भी हो सकता है।

पदोन्नति नियम-2025 में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग को आरक्षण तो दिया गया है पर यह स्थायी नहीं रहेगा। प्रत्येक संवर्ग में प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर इसका निर्धारण पांच साल के लिए होगा। यदि किसी संवर्ग में प्रतिनिधित्व आरक्षण की तय सीमा से अधिक है तो यह कम भी हो सकता है। इसका निर्धारण मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। पदोन्नति नियम में एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित रखे जाने वाले पदों की गणना के साथ ही प्रत्येक संवर्ग में प्रतिनिधित्व प्रशासनिक दक्षता के आधार पर निर्धारित करने का प्रविधान रखा गया है।

एससी के लिए 16% और एसटी के लिए 20% पदोन्नति के पद आरक्षित रखे जाएंगे। पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए संवर्ग में आरक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों के पदों की गणना विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पहले होगी। इसके लिए संख्या का निर्धारण विभागीय मंत्री, विभागाध्यक्ष और सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव स्तर के अधिकारी की समिति करेगी। इसमें एक सदस्य एससी-एसटी वर्ग से अनिवार्य रूप से होगा। यदि किसी संवर्ग में विशेष परिस्थिति नहीं है तो एससी-एसटी के लिए 36% रहेगा।

पांच साल के लिए होगा आरक्षण
जानकारी के अनुसार यदि प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दक्षता के आधार पर कोई विभाग किसी संवर्ग में आरक्षण कम करने का निर्णय लेता है, तो ऐसा मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के अनुमोदन से ही किया जा सकेगा। एक बार जो आरक्षण निर्धारित हो गया, वो पांच साल तक रहेगा। इसके बाद फिर आकलन करके इसे परिवर्तित किया जा सकेगा।

यह प्रविधान इसलिए किया गया है क्योंकि हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के हवाले से कहा था कि आरक्षण के लिए प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक दक्षता को देखा जाए। सूत्रों के अनुसार, 2002 के पदोन्नति नियम से जो पदोन्नतियां हुई, उसके कारण कई संवर्गों में एससी-एसटी वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी तीन-चार पद आगे पहुंच गए। इससे सामान्य वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी पिछड़ गए।

चूंकि, नए नियम में पदोन्नति एक जनवरी 2025 की स्थिति में होनी है और जो अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत हो चुके हैं, उन्हें पदावनत भी नहीं किया गया है इसलिए जब तक वे सेवानिवृत्त नहीं होते, तब तक आगे ही रहेंगे। मंत्रालय में अवर सचिव, उप सचिव के पद पर पहुंचने में सामान्य वर्ग को सालों लग जाएंगे।