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Shiv Puran Katha : ‘स्वाद और विवाद से बचोगे तो ही जीवन सार्थक होगा!’

कथा में दूसरे दिन भी भक्तों का अपार सैलाब उमड़ा!

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Shiv Puran Katha : ‘स्वाद और विवाद से बचोगे तो ही जीवन सार्थक होगा!’

Indore : शिव महापुराण कथा के मर्मज्ञ पंडित प्रदीप मिश्रा सीहोर वाले ने कहा है कि यदि हम स्वाद और विवाद से बचेंगे तो ही हमारा जीवन सार्थक होगा। हमें जीवन में भगवान की कृपा के बिना कुछ नहीं मिल सकता है । यह जीवन कर्म प्रधान है इसलिए हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए।
पं मिश्रा यहां के दलालबाग में विधायक संजय शुक्ला और उनके मित्र मंडल के द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा का श्रद्धालु जनों को श्रवण करा रहे हैं। आज कथा के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में शिव भक्त आयोजन स्थल पर पहुंच गए। दलालबाग का विशाल शामियाना कथा शुरू होने के 2 घंटे पूर्व ही खचाखच भर चुका था। जितने लोग शामियाने के अंदर बैठकर कथा सुन रहे थे उससे दुगुने लोग कथा स्थल के बाहर खड़े होकर अथवा सड़क पर बैठकर कथा सुन रहे थे।
पंडित मिश्रा ने कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि हमारे जीवन में स्वाद और विवाद दो महत्वपूर्ण चीजें हैं। इनसे बचेंगे तभी जीवन सार्थक होगा। स्वाद के चक्कर में हम अपने शरीर को खराब कर लेते हैं और विवाद के चक्कर में दिमाग खराब हो जाता है। स्वाद बहुत थोड़ी देर का होता है, लेकिन उसका आनंद प्राप्त करने में शरीर बिगड़ जाता है। क्रोध भी बहुत थोड़ी देर के लिए आता है लेकिन यदि उस समय नियंत्रण नहीं रखा तो 10 मिनट का क्रोध 10 साल की जेल करा देता है। जब क्रोध आता है तो बहुत सारे लोग कहते हैं आ जाओ देख लेते हैं हम साथ में है क्या होगा लेकिन फिर जो कुछ होता है उसके बाद कोई साथ नहीं होता है। यह संसार है इसका मतलब है कि यहां कोई सार नहीं है।
उन्होंने कथा के प्रसंगों का विवरण देते हुए कहा कि संसार का कोई भी सुख हमें प्रभु की कृपा के बिना नहीं मिल सकता। हम आप जिस भी स्थिति में है, उस स्थिति के लिए हमें प्रभु को धन्यवाद देना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुजनों को चेतावनी देते हुए कहा कि अंधविश्वास पर भरोसा मत करना। चमत्कार पर भरोसा मत करना। कोई धन दौलत से भरा हुआ घड़ा नहीं मिलेगा। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने विष्णु पुराण में विष्णुजी ने, ब्रह्म पुराण में ब्रह्माजी ने यही कहा है कि जीवन में जो कुछ मिलेगा वह कर्म के फल से ही मिलेगा। जब द्रोपती का चीर हरण हो रहा था। साडी खींची जा रही थी, तब वहां पर जो लोग बैठे हुए थे उनमें से कोई भी बचाने नहीं आया। बचाने के लिए तो परमात्मा ही आया था। उसी तरह से जो नाडी देखता है वह नहीं बचा सकता है, बचाने के लिए तो परमात्मा ही आएगा।

जेवर, पर्स, मोबाइल मत लाना
इस कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने वहां आने वाले श्रद्धालुओं से कहा कि आप जब भी कथा सुनने के लिए आओ तो अपने साथ में अपने सोने चांदी के जेवर, पर्स और मोबाइल लेकर मत आना। उन सभी को घर पर ही रख कर आना। यहां पर तो केवल शिवजी के प्रति अपना विश्वास लेकर आना।
पं मिश्रा ने कहा कि हमारा पेट भरने की जिम्मेदारी परमात्मा की है! लेकिन, हमारे द्वारा रखी गई पेटी भरने की जिम्मेदारी परमात्मा की नहीं है। यदि हमारा ड्रेस और एड्रेस सही होगा तो हमें परमात्मा से मिलने से कोई नहीं रोक सकेगा। श्रद्धालुओं को शिव पुराण कथा का मर्म और आज के हालात पर मार्गदर्शन देते हुए पं मिश्रा ने कहा कि व्यक्ति का पेट भरने की जिम्मेदारी परमात्मा की होती है, पेटी भरने की जिम्मेदारी परमात्मा की नहीं होती।
भगवान ने पेट देकर भेजा है इसलिए उसे भरना उसकी जिम्मेदारी है। परिवार दिया है, इसलिए उसका पालन पोषण करना भी उसकी जिम्मेदारी है। रिश्ते-नाते दिए हैं, तो उनका निर्वहन करना भी उसकी जिम्मेदारी है। भगवान ने पेटी नहीं दी, तो उसे भरना भगवान की जिम्मेदारी नहीं है। व्यक्ति जब पेटी को भरने के चक्कर में लगता है तो वह पेट को भूल जाता है और पेटी को भरते-भरते शरीर व्यर्थ हो जाता है।
उन्होने कहा कि ड्रेस और एड्रेस सही हो तो भगवान के द्वार पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता है। यदि हम जुआ खेलने वाले के साथ बैठे हैं तो लोग हमें भी वैसा ही समझेंगे। यदि हम गलत काम करने वाले के साथ बैठेंगे तो लोग हमें भी वैसा ही समझेंगे और वही हमारा एड्रेस हो जाएगा। यदि हम भजन करने वाले के साथ बैठेंगे तो वैसा ही समझा जाएगा और यह सही एड्रेस ही हमें भगवान के द्वार तक पहुंचाएगा।

निगम-प्रशासन से सहयोग की अपील
इस कथा के आयोजक विधायक संजय शुक्ला के द्वारा इंदौर नगर निगम जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से इस आयोजन में सहयोग करने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि आयोजन में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं!! ऐसे में नगर निगम की ओर से इस क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान चलाकर इंदौर की गरिमा के अनुसार सफाई रखी जाए। पुलिस विभाग इन इतनी बड़ी संख्या में आ रहे श्रद्धालुजनों को देखते हुए पूरे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही के लिए सही तरीके से व्यवस्था करें। आयोजन स्थल पर नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाए। उन्होंने दोनों विभागों से सहयोग करने का आग्रह किया है।