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मध्यप्रदेश को सशक्त बनाएगा समरस पंचायत का “शिव फार्मूला”…

फिर रंग लाया हरदा में कमल का प्रयास ...

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मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में ताकत झोंकती भाजपा!

वरिष्ठ पत्रकार कौशल किशोर चतुर्वेदी की ख़ास खबर

समरस पंचायत बनाने का शिव फार्मूला मध्यप्रदेश में हिट हो गया है। समरस पंचायत की शिव की यह शुरुआत प्रदेश को सशक्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। पहली बार में प्रदेश में दस फीसदी पंचायतें भी निर्विरोध निर्वाचित होती हैं, तब भी यह उपलब्धि गागर में सागर भरने वाली है। यह उम्मीद की जा सकती है कि अगली बार पंचायत चुनाव में हर ग्राम पंचायत में यह होड़ रहेगी कि कैसे पंचायत में निर्विरोध निर्वाचन पर सहमति बनाई जाए।
शिव की इस सोच पर भी मध्यप्रदेश सहित देश में अमल होगा और यह पंचायती राज की मूल भावना को साकार भी करेगी। हर जिला अपनी निर्विरोध निर्वाचित पंचायतों पर गर्व महसूस कर रहा है। हरदा जिले में 35 पंचायतों का निर्विरोध निर्वाचन भी उत्साहित करने वाला है। शिवराज की समरस पंचायतों की पहल में मध्यप्रदेश का पहला जिला  हरदा बन गया है।इसमें दो पंचायतें ऐसी हैं, जिसमें महिला सरपंच और पंच यानि पिंक पंचायत बन गईं हैं।
मेरा गांव मेरा तीर्थ योजना के बाद मंत्री कमल पटेल के प्रयास एक बार फिर रंग लाए हैं, तो सभी जिलों में मंत्री-विधायकों ने शिव के समरस पंचायत फार्मूला में रंग भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यही भाव अगले निर्वाचन में जो खुशबू बिखेरेगा, वह सभी के मन को आनंदित करने वाला होगा। तो गांवों के ईमानदारी से भ्रष्टाचार मुक्त विकास की दिशा का सारथी भी बनेगा। बहुत उम्मीद यह भी है कि यह समरस पंचायतें पिंक होने का तमगा हासिल करने की होड़ करेंगी और तब मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण में आदर्श राज्य बनकर दुनिया में आदर्श राज्य बन जाएगा। तब शिव की समरस पंचायत की चिंगारी सूरज बनकर पूरी दुनिया को रोशन करेगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले प्रदेश में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए समरस पंचायतें बनाने की अपील की थी और ऐसी पंचायतों को पुरस्कृत करने की घोषणा भी की थी। मुख्यमंत्री की पहल का व्यापक असर हुआ और सीहोर जिले की 33 ग्राम पंचायतें समरस पंचायतें बनी । मुख्यमंत्री ने निर्गुण निर्विरोध चुने जाने वाले सभी ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं और बधाई दी है।  शिवराज की समरस पंचायतों की पहल में मध्यप्रदेश का पहला जिला हरदा बन गया है।
जिले में 35 ग्राम पंचायतों में निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। 220 पंचायतों में करीब 16 फीसदी पंचायतों को निर्विरोध निर्वाचित होना एक बड़ी उपलब्धि है। कमल पटेल भी इस उपलब्धि के लिए बधाई के हकदार हैं कि हरदा जिला शिव की समरस पंचायतें बनाने की पहल में अव्वल रहा है। हरदा जिले में प्रदेश की सर्वाधिक 35 ग्राम पंचायतें निर्विरोध निर्वाचित होना यह साबित करता है कि कृषि मंत्री की शिव की पहल में रंग भरने की कोशिश रंग लाई है।हरदा जिले की यह सभी ग्राम पंचायतें अब विकास कार्यों को लेकर लखपति हो गई हैं।
ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं उन पंचायतों को पुरस्कार राशि रुपये 5 लाख तथा सरपंच पद हेतु वर्तमान निर्वाचन एवं पिछला निर्वाचन निरंतर निर्विरोध होने पर पुरस्कार राशि रूपये 7 लाख एवं ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच तथा सभी पंच निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, उन पंचायतों को पुरस्कार राशि रुपये 7 लाख का पुरस्कार दिया जाएगा।
ऐसी ग्राम पंचायत जिसके सरपंच तथा सभी पंच महिला निर्वाचित हुए हैं, पुरस्कार राशि रुपये 12 लाख एवं पंचायत में सरपंच एवं पंच के सभी पदों पर महिलाओं का निर्वाचन निर्विरोध रूप से होने पर 15 लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उम्मीद यह की जानी चाहिए कि अगली बार पंचायत निर्वाचन में यह पुरस्कार बढ़कर उम्मीद से भी बहुत ज्यादा होगा और उम्मीद से ज्यादा पंचायतें निर्विरोध निर्वाचित होंगीं। यह सारी राशि जब गांवों के विकास में खर्च होगी, तो गांव-गांव में समरसता संग विकास की बगिया खिलेगी।