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शिवराज की किसान हितैषी सौर ऊर्जा मित्र सोच है कुसुम (अ) योजना के प्रति संवेदनशीलता..

फिलहाल यह विभाग के आला अफसरों की मुट्ठी में कैद है...

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किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार इन्हें उद्यमी बनाकर स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहती हैं। इसी के चलते केंद्र और राज्य सरकारें किसान हितैषी योजनाएं बनाकर कृषि के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने का काम कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी कुसुम (अ) योजना के प्रति मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की संवेदनशीलता उनकी किसान हितैषी और सौर ऊर्जा मित्र सोच को ही प्रतिबिंबित करती है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ओम्कारेश्वर सोलर पावर प्लांट प्रदेश और देश के लिये महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।
इसे मिशन मोड पर लेकर जून तक कार्य पूर्ण करें। तो उन्होंने निर्देश दिया कि कुसुम (अ) योजना के तहत आ रही बाधाओं के लिये बैंकर्स के साथ समन्वय कर मीटिंग कीजिये। आप पूरा वर्क आउट करके दीजिये। सौर ऊर्जा जितनी होगी उतनी हम किसानों को बिजली ज्यादा दे सकेंगे। प्रोग्रेसिव स्टेट के लिये सोलर एनर्जी जरूरी है। लोगों में सोलर एनर्जी के प्रति जागरूकता बढ़ाएं। कार्य में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई कीजिये।
सांची सोलर सिटी को पूरा करके दीजिये, यह महत्वपूर्ण है। तो मुख्यमंत्री ने अपनी मंशा जताई कि ऊर्जा बचाओ , संकल्प दिलाओ की रूपरेखा बनाइये। कन्या पूजन की तरह हर कार्यक्रम में लोगों को ऊर्जा बचाओ का संकल्प मैं करा सकूं। और यह जिज्ञासा भी व्यक्त की, कि जितनी सिंचाई योजना हैं… क्या उन्हें हम सोलर से चला सकते हैं? इसकी रणनीति और योजना तैयार करके दीजिये।
तो मुख्यमंत्री ने नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की बैठक में महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे। सवाल नंबर एक कि जितनी सिंचाई योजनाएं हैं, क्या उन्हें हम सोलर एनर्जी से चला सकते हैं? इसकी क्या रणनीति है..? सवाल नंबर दो कि ओम्कारेश्वर सोलर पावर प्लांट प्रोजेक्ट का कार्य कब तक पूरा होगा? क्या जून तक हम पूरा करने की स्थिति में है? सवाल नंबर तीन, कि विभिन्न वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट में बिजली की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये विभाग की क्या रणनीति है? सवाल नंबर चार, कि ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिये क्या योजना है? सवाल नंबर पांच, कि सोलर के प्रति जनता को कैसे जागरूक कर रहे है?
हम बात करें कुसुम (अ) योजना की, तो इसके तहत केंद्र सरकार किसानों को सौर ऊर्जा उत्पादक बनाकर किसानों की आय बढ़ाना चाहती है। तो सौर ऊर्जा उत्पादन में किसानों की बंजर या कम उपजाऊ जमीन का बेहतर उपयोग भी करना चाहती है। इस योजना के तहत किसान 0.50 मेगावाट से लेकर 2 मेगावाट तक का सोलर पावर प्लांट लगा सकते हैं। किसान भी योजना को लेकर उत्साहित हैं, लेकिन उनकी परेशानी की मुख्य वजह यह है कि वह उद्यमी बनने के लिए आर्थिक प्रबंधन करने में समर्थ नहीं हैं।
सरकार 500 और 1500 मेगावाट सोलर पावर प्लांट लगाने वाले उद्योगपतियों को बैंक गारंटी दे रही है, लेकिन नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अफसरों के दिल किसानों की आर्थिक अक्षमता पर नहीं पसीज रहे हैं। इसके बावजूद भी कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्राथमिकता है कि किसान कुसुम (अ) योजना के तहत प्रदेश में 2000 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने में किसान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
लेकिन सवाल यह है कि किसान के मार्जिन मनी की व्यवस्था के बतौर दो मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए दो करोड़ की व्यवस्था कहां से करें? और बैंक गारंटी कहां से दें? और ऐसे में किसान हितैषी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सौर ऊर्जा मित्र सोच तब तक जमीन पर फलीभूत नहीं हो सकती, जब तक कि किसानों के साथ सरकारी तंत्र संवेदनशीलता का बर्ताव करते हुए मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाएगा। कृषि विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा है कि एग्री इंफ्रा फंड लेते रहें और उसका उपयोग करते रहें। मगर यह किसानों का दुर्भाग्य ही है कि कुसुम (अ) योजना में किसानों को एग्री इंफ्रा फंड का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
मुख्यमंत्री की मंशा पर यदि नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के अफसर किसानों के प्रति सकारात्मक रवैये के साथ आगे नहीं बढ़ते हैं, तो यह बात तय है कि किसानों की जमीन पर उद्योगपति ही छोटे-छोटे सोलर पावर प्लांट की खेती करेंगे और किसान अपनी आय के दोगुनी होने के सपने ही देखता रहेगा। मुख्यमंत्री का समीक्षा बैठक में इशारा शायद इसी तरफ था, क्योंकि किसान पुत्र होने के नाते वह किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर समझते हैं।
और इसीलिए उन्होंने अफसरों से दो टूक कहा है कि कुसुम (अ) योजना के तहत आ रही बाधाओं के लिये बैंकर्स के साथ समन्वय कर मीटिंग कीजिये। और आप पूरा वर्क आउट करके दीजिये। बाकी अब अफसरों की मेहरबानी पर निर्भर है कि मध्यप्रदेश में किसान दो मेगावाट तक के सोलर पावर प्लांट लगाकर खुशहाल जिंदगी के सपने देख पाते हैं या फिर उनके सपनों पर भी उद्योगपतियों का कब्जा हो जाएगा।यही कहा जा सकता है कि शिवराज की किसान हितैषी सौर ऊर्जा मित्र सोच है कुसुम (अ) योजना के प्रति संवेदनशीलता… पर फिलहाल यह विभाग के आला अफसरों की मुट्ठी में ही कैद है…!