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Story of A Song : गीत की कहानी के बहाने अपनी पीड़ा बता बैठे गीतकार और संगीतकार!

सफल गीत को फ़िल्म और गायक के रूप में ही क्यों पहचाना जाए!

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Story of A Song : गीत की कहानी के बहाने अपनी पीड़ा बता बैठे गीतकार और संगीतकार!

Mumbai : किसी गीत को फ़िल्म और उसके गायक के नाम से तो जाना जाता है, पर गीतकार और संगीतकार को भुला दिया जाता है। पहले संगीतकारों और गीतकारों के फोटो एल्बमों और कभी फिल्म के पोस्टरों पर भी दिखाए देते थे, पर अब ये नही होता। गीतकारों और संगीतकारों के मंच पर अपने इस अधिकार के लिए लड़ने की प्रतिज्ञा की गई। साथ ही श्रोताओं से कहा गया कि वे फ़िल्म के गीतकारों और संगीतकारों को सोशल मीडिया पर भी महत्व दें।

यह बात इंडियन परफॉर्मिंग राइट्स सोसाइटी (IPRS) और म्यूजिक कंपोजर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MCAI) ने मिलकर मुंबई संगीत संस्थान (MMI) में उठाई। वे एक सुपर शो ‘स्टोरी आफ अ सॉंग’ के आयोजन अवसर पर जुटे थे।
इस आयोजन में मशहूर गीतकार समीर अंजान, संगीतकार द्वय आनंद-मिलिंद, बैकग्राउंड स्कोर के विशेषज्ञ राजू सिंह, गीतकार स्व आनंद बक्षी के सुपुत्र राकेश आनंद बक्षी, संगीतकार-संगीत निर्माता मर्लिन डिसूजा और गीतकार राजशेखर ने शिरकत की। उन्होंने अपने अनुभव साझा कर संगीतप्रेमियों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम के सूत्रधार गीतकार मयूर पुरी ने अपनी चुटीली शैली में संगीत और कहानियों का विलय किया। इससे एक अविस्मरणीय अनुभव बना।

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एमसीएआई के संगीत शिरोमणि सोमेश माथुर और आईपीआरएस की रुपा बैनर्जी के इस शो के दर्शकों में संगीतकार इंद्रजीत ‘टब्बी’ शर्मा, विपिन मिश्रा, विवेक प्रकाश, जस्टिन-उदय, विवेक राजगोपालन भी मौजूद थे। महत्वपूर्ण बात जो सभी वक्ताओं की और से की गई, वो लोगों को यह जागरूक करने का आग्रह था कि जिन गीतों को पसंद किया गया, उनके पीछे एक कहानी जरूर है। जिसमें कई हफ्तों की कोशिश शामिल होती है। यह आयोजन यूट्यूब पर भी देखा जा सकता है।

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सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि सबसे निंदनीय बात यह है कि गीत को गायक और फिल्म के नाम से तो जाना ही जाता है। लेकिन, इसे बनाने वाले संगीतकारों और गीतकारों को उतना महत्व नहीं दिया जाता। गीतकार समीर ने अपना ताजा दुख व्यक्त करते हुए बताया कि आजकल फिल्मों के पोस्टर और विज्ञापनों में कभी भी संगीतकार और गीतकार का उल्लेख नहीं किया जाता, जो आपराधिक है। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशक पहले तक, संगीतकारों और गीतकारों की तस्वीरें संगीत एल्बमों और कभी-कभी फिल्म के पोस्टरों पर भी जरूरी होती थीं।

पैनल ने उनके अधिकारों के लिए लड़ने की प्रतिज्ञा की और सभी श्रोताओं से अनुरोध किया कि वे गीतकारों और संगीतकारों को जानें और उन्हें सोशल मीडिया पर भी महत्व दें। क्योंकि, यदि रचनाकारों ने अपना काम नहीं किया तो गायकों, सितारों और फिल्मों के पास गाने या अभिनय करने के लिए कुछ भी नहीं होगा। कार्यक्रम में मौजूद फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने भी संगीतकारों और गीतकारों से जुड़े इस ज्वलंत मुद्दे पर पहल करने का आश्वासन दिया।

एमसीएआई की 65वीं वर्षगांठ भी मनाई गई, जिसने सिने म्यूजिक कम्पोजर्स एसोसिएशन (सीएमडीए) के रूप में अपना जीवन शुरू किया था और आज संगीतकारों के हितों की रक्षा के लिए बड़ी भूमिका अदा कर रहा है!