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जम्मू-कश्मीर में आतंक के खात्मे का यह लोकतांत्रिक अध्याय सुखद है…

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जम्मू-कश्मीर में आतंक के खात्मे का यह लोकतांत्रिक अध्याय सुखद है…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

जम्मू-कश्मीर में सरकार के गठन के बाद आतंकी घटनाओं का बढना दुखद और चिंताजनक है। तो केंद्रशासित प्रदेश की पहली लोकतांत्रिक सरकार द्वारा आतंकी गतिविधियों के खात्मे का इरादा एक सुखद अहसास करा रहा है। केंद्रशासित प्रदेश जिसमें उप राज्यपाल (एलजी) की भूमिका महत्वपूर्ण है, उसमें मुख्यमंत्री की नेक नीयत मजबूरी है…तब भी स्वागत योग्य है। भविष्य में इसे आतंकी गतिविधियों के खात्मे के लोकतांत्रिक प्रयास के रूप में सराहा जाएगा। सरकार और कांग्रेस जब खुद ऐसे हमले की निंदा कर रही है, जम्मू-कश्मीर के जन-जन में जाता यह संदेश मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत करने वाला है। इससे उनके मन में यह भाव भर जाएगा कि आतंकियों पर अब अंतिम प्रहार होकर ही रहेगा। श्रीनगर में ग्रेनेड हमले के बाद एलजी ने अधिकारियों को फ्री हैंड देने की बात कहकर अपनी मंशा जता दी है कि अब आतंकवादियों की खैर नहीं है।

उप राज्यपाल ने वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से कहा, हमारे नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके अलावा उन्होंने हमले में घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और जिला प्रशासन को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। उपराज्यपाल मनोह सिंह ने की बड़ी बैठक लेकर यह जता दिया है कि कानून-व्यवस्था के मामले में लोकतांत्रिक सरकार से ज्यादा उनकी जिम्मेदारी है।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में ग्रेनेड हमले को लेकर डीजीपी नलिन प्रभात और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को आतंकवादियों और उनके सहयोगियों को दंडित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। कहा कि आतंकवादी संगठनों को कुचलने और इस मिशन को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने आतंकवादी तत्वों को उनके नापाक मंसूबों में सफल नहीं होने देने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उप राज्यपाल ने वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से कहा कि हमारे नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

श्रीनगर में विधानसभा का सत्र शुरू होने से एक दिन पहले आतंकियों ने रविवारीय मार्केट में ग्रेनेड से हमला कर दिया। हमले में एक दर्जन नागरिक घायल हुए हैं। हमले के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई है। घायलों को इलाज के लिए भर्ती करा दिया गया है। सभी की हालत स्थिर है। हमलावरों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि, यह हमला, पर्यटक स्वागत केंद्र (टीआरसी) के पास ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन केंद्र वाले एक भारी सुरक्षा वाले परिसर के पास हुआ। एक दिन पहले सुरक्षा बलों ने श्रीनगर शहर के खानयार इलाके में लश्कर-ए-ताइबा के एक शीर्ष पाकिस्तानी कमांडर उस्मान लश्कर उर्फ छोटा वलीद को मुठभेड़ में मार गिराया था। ग्रेनेड हमला आतंकी के मारे जाने के एक दिन बाद हुआ है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “पिछले कुछ दिनों से घाटी के कुछ हिस्सों में हमलों और मुठभेड़ों की खबरें सुर्खियों में हैं। श्रीनगर में रविवार के बाजार में निर्दोष दुकानदारों पर ग्रेनेड हमले की खबर बेहद परेशान करने वाली है। निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का कोई औचित्य नहीं हो सकता। उन्होंने हिदायत देते हुए कहा, “सुरक्षा तंत्र को जल्द से जल्द हमलों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए ताकि लोग बिना किसी डर के अपना जीवन जी सकें।तो जम्मू-कश्मीर कांग्रेस ने ऐसे हमलों को रोकने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि दुकानदारों पर ग्रेनेड हमला दुर्भाग्यपूर्ण और भयावह है। जम्मू-कश्मीर पुलिस को ऐसे क्रूर और अमानवीय हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि जनता स्वतंत्र रूप से और बिना किसी डर के घूम सके। हमले पर कांग्रेस नेता रविंदर शर्मा ने कहा, ‘यह माहौल बिगाड़ने की साजिश है। चुनाव होने और नई सरकार बनने के बाद से ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं। घाटी में अभी भी आतंकवाद है। केंद्र सरकार के पास पूरी कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था है। हम सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। श्रीनगर में हमले को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि श्रीनगर के संडे मार्केट में ग्रेनेड हमला बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे तत्व हमेशा देश को अस्थिर करने का काम करते रहते हैं। भारत सरकार आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस रखती है। भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार इस संबंध में संयुक्त कार्रवाई करेगी। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। नई सरकार के गठन को अभी मुश्किल से 20 दिन हुए हैं, ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेलना ठीक नहीं है। इससे पाकिस्तान को बढ़त मिलती है।

फिलहाल यही माना जा सकता है कि जम्मू-कश्मीर में नए लोकतांत्रिक अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। इसमें चुनी हुई सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाने की चुनौती है, तो केंद्र सरकार और उप राज्यपाल का दबाव मुख्यमंत्री को जिम्मेदारी के निर्वहन में भटकाव न होने की हिदायत भी दे रहा है। फिलहाल उम्मीद यही है कि जम्मू-कश्मीर का नया लोकतांत्रिक अध्याय सुखद तस्वीर बनाकर सबके दिलों में नया भरोसा जगाएगा…।