WhatsApp Image 2025 08 07 At 9.31.47 PM
Home मीडियावाला ख़ास

Trial Run Hinges on SC Order : रासायनिक कचरे को जलाने का ट्रायल रन ‘सुप्रीम’ आदेश पर टिका!    

सुप्रीम कोर्ट में 'ट्रायल रन' के खिलाफ याचिका सबसे पहले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध!  

457

Trial Run Hinges on SC Order : रासायनिक कचरे को जलाने का ट्रायल रन ‘सुप्रीम’ आदेश पर टिका!

  

New Delhi : पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने का ट्रायल रन 27 फ़रवरी को होना फ़िलहाल तय नहीं लग रहा। क्योंकि, इसमें सुप्रीम कोर्ट का पेंच आ गया। यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रायल रन के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई सबसे पहले करता है और इस पर रोक देता है, तो ट्रायल रन नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट 27 फरवरी को पीथमपुर में खतरनाक रासायनिक कचरे के परिवहन और डंपिंग को चुनौती देने वाले याचिकाओं पर सबसे पहले सुनवाई करने पर सहमत हो गया। न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिना देरी किए मामले की सुनवाई करने का निर्णय तब लिया, जब याचिकाकर्ताओं ने मौखिक उल्लेख किया कि 27 फरवरी को 10 मीट्रिक टन कचरे का ‘ट्रायल रन’ किया जाने वाला है। इस बारे में इंदौर कमिश्नर दीपक सिंह ने ‘मीडियावाला’ से कहा कि हमारी पूरी तैयारी है। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही आगे कदम बढ़ाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के अधिकारियों से कहा कि वे सामग्री के आधार पर यह दिखाएं कि क्या पीथमपुर में भोपाल गैस त्रासदी स्थल से रासायनिक अपशिष्ट के निपटान के संबंध में वादी द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं में कोई तथ्य है। क्या अधिकारियों ने आसपास के नागरिकों के लिए खतरे की आशंकाओं को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम उठाएं। कोर्ट ने कहा कि जब तक उठाई गई आशंकाएं वास्तविक नहीं पाई जातीं, हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेखित किया, जो भोपाल गैस त्रासदी स्थल से पीथमपुर तक 337 मीट्रिक टन ‘खतरनाक’ रासायनिक अपशिष्ट के परिवहन और निपटान के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रही है।

मामले का उल्लेख करने वाले वकील ने न्यायालय को बताया कि 17 फरवरी को नोटिस जारी करने के बाद 18 फरवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 फरवरी से 10 मीट्रिक टन का ट्रायल रन करने का आदेश दिया। इस पृष्ठभूमि में उन्होंने अनुरोध किया कि मामले को 27 फरवरी को ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया जाए और इस बीच अंतरिम आदेश पारित किया जाए।