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Trouble Again Regarding Some Names : मुख्यमंत्री अचानक दिल्ली तलब, कुछ नामों को लेकर फिर पेंच फंसा!

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Trouble Again Regarding Some Names : मुख्यमंत्री अचानक दिल्ली तलब, कुछ नामों को लेकर फिर पेंच फंसा!

Bhopal : मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जिस तरह दिल्ली दौरे कर रहे हैं, उससे लगता है कि अभी मंत्रियों के नामों की लिस्ट फ़ाइनल नहीं हुई। कई नामों को लेकर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नए चेहरों को ज्यादा जगह देना चाहते हैं। उन्हें वरिष्ठ विधायकों के नाम पर आपत्ति बताई जा रही है। आज शाम उन्हें फिर दिल्ली बुलाया गया है। केंद्रीय नेतृत्व लोकसभा चुनाव को देखते हुए जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साध रहा है। आज मंत्रिमंडल की सूची को अंतिम रूप दिया जा सकता है। 7 दिन के अंदर डॉ मोहन यादव का ये तीसरा दिल्ली दौरा है।

मुख्यमंत्री दिल्ली में भाजपा केे राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में भी शामिल होंगे। वे दो दिन (गुरुवार और शुक्रवार) को दिल्ली में ही थे। वहां उनकी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात हुई थी। इस दौरान उनके साथ डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल भी थे। उनकी सभी मुलाकातों को मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन, लगता है अभी सहमति नहीं बन पाई। शनिवार शाम वे फिर दिल्ली रवाना हो गए। इससे माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही थी, उसके लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा।

इस बीच राज्यपाल मंगूभाई पटेल 23-24 दिसंबर को रीवा के दो दिवासीय दौरे पर रहेंगे। राज्यपाल कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। उनके साथ डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल भी मौजूद रहेंगे। इसका मतलब है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जल्दीबाजी वाली स्थिति नजर नहीं आती। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि मंगलवार शाम को शपथ हो सकती है।

यहां फंसा है मंत्रिमंडल का पेंच

मुख्यमंत्री बनते ही डॉ मोहन यादव के दिल्ली दौरे बढ़ गए। जितनी कवायद मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर नहीं हुई, उससे ज्यादा मंत्री पद को लेकर हो रही है। जिस तरह शनिवार को उज्जैन दौरे के बाद बाद अचानक उन्हें दिल्ली तालाब किया गया, उससे लगता है कि अभी कुछ कामों को लेकर पेज फंसा हुआ है। बताते हैं कि सबसे ज्यादा मुश्किल मालवा और बुंदेलखंड इलाके में आ रही है। मंत्री पद को लेकर जबरदस्त खींचतान है। बुंदेलखंड में पुराने दिग्गजों के साथ नए दावेदार भी कम नहीं है।

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यही स्थिति मालवा में भी दिखाई दे रही है। यहां भी पुराने चेहरों के अलावा विधानसभा चुनाव में हैट्रिक मारकर जीत का रिकॉर्ड बना चुके नेता भी इस बार मंत्री पद की रेस में हैं। मालवा के आदिवासी इलाके में भी दावेदारों की कमी नहीं है। धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन और खंडवा की कई सीटों पर आदिवासी नेता जीते हैं। मुख्यमंत्री भी उन विधायकों को मंत्री बनाना चाहते हैं, जो कई बार जीतकर भी कभी मंत्री नहीं बन सके। लेकिन, ये गुत्थी अभी तक सुलझ नहीं रही। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की भी मंशा है कि आदिवासी विधायकों को मौका दिया जाए। इसलिए भी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के चुनाव के दौरान ज्यादातर दौरे आदिवासी इलाकों में ही हुए थे।