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UGC : PhD की अनिवार्य अहर्ता हटाई, Assistant Professor की नई भर्ती सूचनाएं फिर से निकालना पड़ेगी

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UGC : PhD की अनिवार्य अहर्ता हटाई

भोपाल। बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय ने 13 अक्टूबर को सहायक प्राध्यापक (आरक्षित वर्ग) के खाली पड़े 7 पदों पर सीधी भर्ती के लिए सूचना जारी की है। इसमें PhD को अनिवार्य अहर्ता बताया गया है! जबकि, इसके दो दिन पहले ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने कहा है कि 1 जुलाई, 2023 तक विश्वविद्यालयों के विभाग में सहायक प्रोफेसर (Assistant Professor) के पद पर सीधी भर्ती के लिए PhD डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं होगी। UGC ने कहा कि यह संशोधन भारत के राजपत्र के भाग- III, खंड- 4 में हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशित किया है। ऐसी स्थिति में अब मध्यप्रदेश की उन सभी University को PhD की अहर्ता हटाकर पदों का विज्ञापन फिर से निकालना पड़ेगा।

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालयों के विभागों में सहायक प्रोफेसरों (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की सीधी भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यता के रूप में PhD को 1 जुलाई 2021 से 1 जुलाई 2023 तक बढ़ा दिया है। सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए PhD की न्यूनतम पात्रता बनाने वाले UGC के 2018 के नियम 2021 से लागू होने थे। हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब, मानदंड को जुलाई 2023 तक बढ़ा दिया गया है। यानी UGC में नेट स्कोर के आधार पर नियुक्तियां जारी रहेगी।

उच्च शिक्षा संस्थानों के रिक्त पद

इस कदम से उच्च शिक्षा संस्थानों के रिक्त पदों को सामान्य से अधिक तेजी से भरने की उम्मीद है। UGC ने एक आधिकारिक नोटिस जारी करके ये जानकारी दी है।

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आधिकारिक बयान के मुताबिक 1 जुलाई 2023 से University सहायक प्रोफेसर के पद पर सीधी भर्ती के लिए PhD होना अनिवार्य होगा। इस संशोधन को UGC (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा में मानकों के रखरखाव के लिए उपाय), संशोधन विनियमन, 2021 के रूप में जाना जाएगा।

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वर्तमान के मानदंडों के मुताबिक, NET, SET, SLET सहित शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले उम्मीदवार सहायक प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। जिन आवेदकों को UGC के नियमों के अनुसार PhD प्रदान की गई है, उन्हें NET/SET/SLET की न्यूनतम पात्रता शर्त से छूट दी जाएगी।

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नियम लागू न होने कारण पहले UGC को इस नीति को लागू न करने की मांग करते हुए कई अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे। इनमें दावा किया गया था कि यह NET योग्य उम्मीदवारों को प्रभावित करेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम, 2018 के तहत सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए PhD की न्यूनतम अहर्ता को मंजूरी दी गई है। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे तत्काल कार्यान्वयन से वंचित न रहें, 2018 में उम्मीदवारों को PhD पूरी करने के लिए 3 साल का समय दिया गया था। लेकिन, महामारी के कारण इसे आगे बढ़ाया गया है।

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