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Ayodhya is Supernatural : अयोध्या को आंखों से महसूस नहीं किया जा सकता!

स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कहा 'अयोध्या आत्मा की अंतर अनुभूति का विषय है!'  

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Ayodhya is Supernatural : अयोध्या को आंखों से महसूस नहीं किया जा सकता!

Ayodhya : रामलला की जिस दिन और जिस मुहूर्त में प्राण प्रतिष्ठा हो रही है, वह उचित है। मुहूर्त को लेकर प्रश्न तब भी उठा था, जब त्रेता युग में भगवान राम का राज्याभिषेक हो रहा था। गुरु वशिष्ठ से मुहूर्त को लेकर सवाल किए थे। तब, उन्होंने बहुत सुंदर जवाब दिया था कि श्रीराम का जब भी राज्याभिषेक होगा वह मुहूर्त शुभ ही होगा। रामलला अयोध्या में तो हमेशा से ही विराजमान हैं।

यह बात शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कही, वे अयोध्या पहुंचे हैं। उन्होंने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई और कहा कि अयोध्या अलौकिक है। इसे आंखों से देखा ही नहीं जा सकता। जो अयोध्या को आंखों से देखने की कोशिश करते हैं, वे अयोध्या के साथ न्याय नहीं कर रहे। इसलिए कि अयोध्या आत्मा की अंतर अनुभूति का विषय है, इसे आंखों से महसूस नहीं किया जा सकता।

जो आध्यात्मिकता 80 के दशक में देखी थी, वह आज भी है। अयोध्या राम के समय में आई ऐसा नहीं है, ये भूमि देवताओं का तप स्थान रहा है। अयोध्या के हर कण से राम-राम प्रतिध्वनित होता है, उसके सुनने के लिए समझने के लिए जीवन में किसी सद्गुरु का होना जरूरी है। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि भौतिक दृष्टि से देखें तो अयोध्या बदल चुकी है।

रामलला जब टेंट में विराजमान थे, उनको स्थापित करने वाले लोगों में मैं भी था। मेरा यहां आना 1980 से जारी है। जिस दिन ढांचा गिरा है, उस दिन भी मैं मौजूद था। उसके बाद जब अस्थायी मंदिर का निर्माण हुआ तो उसका भी गवाह रहा। आध्यात्मिक दृष्टि से विचार करें, तो जो अयोध्या पहले थी, वही अयोध्या आज भी है। हालांकि इस तीर्थ का भौतिक विकास तेजी से हुआ है। यहां विमान उड़ने लगे हैं। आवागमन सुलभ हुआ, बड़े-बड़े होटल बन गए।